Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा में सक्ती वेदांता पावर प्लांट हादसे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस हादसे में 25 लोगों की मौत के बाद वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर FIR दर्ज करना सरकार का एक दिखावटी कदम है। बघेल ने सरकार से कड़ा सवाल किया कि क्या यह कार्रवाई केवल मामले को दबाने के लिए की गई है? उन्होंने पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए पूछा कि क्या भविष्य में होने वाले ऐसे हादसों में भी कंपनी के डायरेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी या यह नियम सिर्फ अनिल अग्रवाल तक सीमित है?

मंत्री की फिसली जुबान, सदन में बढ़ी गहमागहमी
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जब इस सवाल का जवाब देने का प्रयास किया, तो उनकी जुबान फिसल गई। उन्होंने गलती से यह कह दिया कि “मुख्यमंत्री जी अनिल अग्रवाल को बचाना चाहते हैं।” इस बयान के सामने आते ही सदन में हड़कंप मच गया। भूपेश बघेल ने तुरंत इस मुद्दे को लपकते हुए मंत्री को आड़े हाथों लिया। अपनी गलती का एहसास होते ही मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन में माफी मांगी और अपने शब्दों को सुधारते हुए अपनी बात पूरी की।

अजय चंद्राकर और बघेल के बीच हुई बहस
बहस के दौरान विधायक अजय चंद्राकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सदन के भीतर किसी व्यक्ति का नाम लेकर इस तरह कार्रवाई की मांग करना उचित नहीं है। चंद्राकर ने तर्क दिया कि यदि किसी पर आरोप है, तो प्रक्रिया के तहत उन्हें सदन में बुलाकर स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए। इस पर भूपेश बघेल ने चुनौती देते हुए कहा कि सरकार में हिम्मत है तो उन्हें सदन में बुलाकर दिखाए। मामला यहीं नहीं रुका, बल्कि सदन की कार्यवाही के दौरान तीखी बहस का केंद्र बन गया।
‘छत्तीसगढ़ बेचना बंद करो’ के नारों से गूंजा सदन
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि वेदांता ग्रुप के चेयरमैन पर की गई कार्रवाई केवल उन्हें दबाव में लाने और किसी अन्य बड़े औद्योगिक घराने को लाभ पहुँचाने की एक सोची-समझी साजिश है। कांग्रेस ने सदन में आरोप लगाया कि सरकार अडानी ग्रुप को फायदा पहुँचाने के लिए वेदांता के खिलाफ यह कार्रवाई कर रही है। कांग्रेस विधायकों ने ‘छत्तीसगढ़ बेचना बंद करो’ के नारे लगाते हुए वेल में आकर जमकर हंगामा किया। सत्ता पक्ष के प्रति अपना विरोध दर्ज कराते हुए अंततः कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
सरकार का बचाव और भविष्य की स्थिति
विपक्ष के सवालों के जवाब में उद्योग मंत्री ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि हादसे के मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सरकार के स्पष्टीकरण से विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखा। यह मुद्दा अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़े विवाद के रूप में उभर कर सामने आया है, जहाँ औद्योगिक हादसों को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है। सरकार के लिए आने वाले समय में इस मामले में निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी।
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