US Iran Conflict : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (हॉर्मोज़ जलडमरूमध्य) में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सेना ने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका युद्ध या सैन्य दबाव के जरिए इस रास्ते को खोलने की अपनी मंशा पूरी नहीं कर पाएगा। अकरमिनिया के अनुसार, इस गतिरोध का एकमात्र समाधान यह है कि अमेरिका अपनी मनमानी छोड़कर ईरान के अधिकारों का सम्मान करे और जून 2026 में हुए युद्ध-समाप्ति समझौते (सीजफायर एग्रीमेंट) की शर्तों का पूरी तरह से पालन करना सुनिश्चित करे।

युद्ध-समाप्ति समझौते के उल्लंघन का अमेरिका पर गंभीर आरोप
तेहरान के दक्षिणी क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए जनरल अकरमिनिया ने अमेरिका पर शांति समझौते का लगातार उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन के लिए ईरान द्वारा स्थापित व्यवस्थाओं को स्वीकार करने के बावजूद, क्षेत्र में अपनी दादागिरी दिखाते हुए एक नया शिपिंग मार्ग बनाने का प्रयास किया है, जो सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय सहमति का अपमान है। इस दौरान उन्होंने इस्लामिक क्रांति के नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की शहादत का जिक्र करते हुए पिछले चार महीनों में ईरानी सशस्त्र बलों के प्रति वहां की जनता द्वारा दिखाए गए अटूट समर्थन और भरोसे की जमकर सराहना भी की।

‘आखिरी सांस तक अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे’: ईरानी सेना
ईरानी सेना ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को किसी भी प्रकार की आक्रामकता, युद्ध या अमेरिका की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों के माध्यम से नियंत्रित नहीं करने दिया जाएगा। जनरल अकरमिनिया ने जोर देकर कहा कि ईरानी सशस्त्र बल इस रणनीतिक जलमार्ग पर देश के प्रभुत्व और अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आखिरी सांस तक लड़ने के लिए तैयार हैं और वे एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, ईरान अपने बचाव के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
ट्रंप का ‘मालिकाना हक’ का दावा और ईरान की नाराजगी
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में स्थिति अत्यंत विस्फोटक बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को अपना अधिकार क्षेत्र बताते हुए खुद को इसका ‘गार्जियन’ घोषित किया है। ट्रंप ने इस मार्ग से गुजरने वाले सभी कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत का भारी ‘टोल टैक्स’ या सुरक्षा शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिसे ईरान ने सीधे तौर पर अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है। ईरान का कहना है कि यह जलमार्ग ऐतिहासिक रूप से उसका अभिन्न हिस्सा रहा है और किसी भी विदेशी शक्ति को उसे उसके अधिकारों से वंचित करने का कोई हक नहीं है।
कूटनीतिक संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा यह वाकयुद्ध वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और गैस व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है, और किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को ठप कर सकता है। जहाँ ट्रंप प्रशासन इसे अपनी सुरक्षा और निगरानी का हिस्सा बता रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी आर्थिक और रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा का मामला मानता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक वार्ता से कोई समाधान निकलेगा या यह क्षेत्र एक बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा।
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