Jashpur Bear Rescue: जशपुर जिले के मनोरा चौकी क्षेत्र स्थित गजमा गांव में एक भालू के साथ बेहद खतरनाक घटना सामने आई। दरअसल, कटहल के लालच में पेड़ पर चढ़ा एक भालू वहां पहले से बिछाए गए तार के फंदे में बुरी तरह फंस गया। ग्रामीणों ने जब पेड़ पर भालू को छटपटाते देखा, तो तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कटहल की सुरक्षा के नाम पर या किसी अन्य मंशा से पेड़ पर दोपहिया वाहन के क्लच वायर से जानलेवा फंदा बनाया गया था। यह घटना न केवल वन्यजीवों के प्रति मानवीय क्रूरता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र में अवैध शिकार के खतरों को भी उजागर करती है।

विशेषज्ञों की टीम का साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही वन विभाग और ग्रीन नेचर वेलफेयर सोसायटी (GNWS) की संयुक्त टीम मौके पर पहुंच गई। शुरुआती प्रयासों में भालू को बिना बेहोश किए निकालने की कोशिश की गई, लेकिन डर और दर्द के कारण भालू लगातार आक्रामक हो रहा था, जिससे रेस्क्यू दल के लिए खतरा बढ़ गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से अंबिकापुर से वन्यजीव विशेषज्ञों की विशेष टीम बुलाई गई। विशेषज्ञों ने डार्ट गन का उपयोग कर भालू को ट्रेंक्यूलाइज (बेहोश) किया। इसके बाद, अत्यंत सावधानी बरतते हुए तार को काटकर ग्रीन नेट की मदद से उसे सुरक्षित जमीन पर उतारा गया।

उपचार के बाद जंगल में छोड़ा गया भालू
जमीन पर उतारने के तुरंत बाद पशु चिकित्सकों की टीम ने मौके पर ही भालू का प्राथमिक उपचार किया। केशव हुसैन, जो GNWS के सदस्य हैं, ने बताया कि भालू को गहन निगरानी में रखा गया और आवश्यक उपचार के बाद जब वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया, तो उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिसे देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। भालू पिछले एक महीने से गजमा और उसके आसपास के जंगलों में घूमता देखा जा रहा था, जिससे आशंका है कि उसे फंसाने की साजिश किसी शरारती तत्व द्वारा काफी समय से रची जा रही थी।
वन विभाग की सख्त चेतावनी: अवैध फंदा लगाने वालों पर होगी कार्रवाई
जशपुर के डीएफओ शशि कुमार ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेड़ पर तार का फंदा किसने और किस उद्देश्य से लगाया, इसकी गहन जांच की जा रही है। वन विभाग इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा है। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना वन्यजीवों के लिए बने कानून के प्रति समाज में जागरूकता लाने की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित करती है, ताकि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
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