Red Palms: अक्सर हम अपनी हथेलियों के रंग में बदलाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार हथेलियां सामान्य से अधिक लाल दिखाई देने लगती हैं, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ‘पामर एरिथेमा’ (Palmar Erythema) कहा जाता है। यह स्थिति आमतौर पर अंगूठे और छोटी उंगली के नीचे वाले मांसल हिस्से में अधिक देखी जाती है। पामर एरिथेमा में आमतौर पर न तो दर्द होता है और न ही खुजली या जलन, जिसके कारण लोग इसे गर्मी या एलर्जी का मामूली असर समझ लेते हैं। हालांकि, यदि यह लालिमा लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह शरीर के भीतर छिपी किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

लिवर स्वास्थ्य और लाल हथेलियों का कनेक्शन
यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के सेंटर फॉर IBD के निदेशक और वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, डॉ. किरण पेड्डी के अनुसार, हमारा लिवर शरीर में हार्मोन और विषैले पदार्थों को प्रोसेस करने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। जब लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का स्तर असंतुलित हो सकता है। इस हार्मोनल बदलाव के कारण हथेलियों की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं (blood vessels) फैलने लगती हैं, जिससे हथेली लाल दिखाई देने लगती है। यह लक्षण विशेष रूप से लिवर सिरोसिस, क्रॉनिक हेपेटाइटिस और एडवांस फैटी लिवर डिजीज जैसी स्थितियों में अधिक देखने को मिलता है।

क्या हर लाल हथेली बीमारी का सूचक है?
यह समझना बेहद आवश्यक है कि हथेलियों की लाली का अर्थ हमेशा लिवर की बीमारी ही नहीं होता। डॉ. किरण पेड्डी स्पष्ट करते हैं कि गर्भावस्था, रूमेटाइड आर्थराइटिस, थायरॉयड विकार, और अनियंत्रित डायबिटीज जैसी स्थितियों में भी यह लक्षण प्रकट हो सकता है। कई लोगों में यह बिना किसी गंभीर रोग के भी प्राकृतिक रूप से हो सकता है। इसलिए, केवल हथेलियों को देखकर निष्कर्ष पर पहुंचना गलत है। डॉक्टर मरीज के संपूर्ण मेडिकल इतिहास और अन्य शारीरिक लक्षणों का परीक्षण करके ही किसी सही निष्कर्ष तक पहुंचते हैं।
कब हो जाना चाहिए डॉक्टर से परामर्श?
यदि हथेलियों की लालिमा के साथ शरीर कुछ अन्य गंभीर संकेत दे रहा हो, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इन लक्षणों में त्वचा या आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), अत्यधिक और निरंतर थकान, पेट या पैरों में सूजन, बिना कारण वजन का घटना, शरीर पर नीले निशान पड़ना या तीव्र खुजली शामिल है। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे लिवर की गंभीर समस्या की चेतावनी मानकर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), अल्ट्रासाउंड या फाइब्रोस्कैन जैसी जांचें करवानी चाहिए।
लिवर को सुरक्षित रखने के उपाय
पामर एरिथेमा का कोई अलग से उपचार नहीं है, क्योंकि यह स्वयं एक बीमारी न होकर एक लक्षण मात्र है। इसका मूल इलाज उस अंतर्निहित बीमारी को ठीक करने में निहित है जिसके कारण यह हो रहा है। लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार का सेवन करें, शरीर का वजन नियंत्रित रखें और शराब का सेवन पूरी तरह सीमित या बंद कर दें। नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं और बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा का लंबे समय तक सेवन न करें। समय रहते की गई सही जांच लिवर की गंभीर बीमारियों को समय रहते रोकने और बेहतर उपचार में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकती है।
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