Bijapur Flood : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग स्थित बीजापुर जिले के कई दूरस्थ और अतिसंवेदनशील गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हर वर्ष मानसून के दौरान भारी बारिश और उफनते नदी-नालों के कारण कई गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह टूट जाता है। छिन्नकवाली पंचायत के अंतर्गत आने वाले गुड्डीपाल, कंदुलनाट, आदेड, रालापाल और छिन्नकवाली जैसे गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही उनका जीवन मानो ठहर जाता है। आवागमन बंद होने से दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है और लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उफनती नदियां बनती हैं सबसे बड़ी चुनौती
ग्रामीणों के अनुसार, लगातार बारिश के दौरान नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह समाप्त हो जाता है। कई दिनों तक लोग अपने गांवों से बाहर नहीं निकल पाते और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में किसी भी आपातकालीन जरूरत के समय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल यही हालात बनते हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा गंभीर असर
बारिश का सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर देखने को मिलता है। गांवों में स्कूल तो संचालित हैं, लेकिन खराब सड़क और संपर्क मार्ग बंद होने के कारण शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच पाते। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों की पढ़ाई लगातार बाधित होती है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है। ग्रामीणों ने स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।
समय पर नहीं पहुंच पाता पीडीएस का राशन
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाला राशन भी बारिश के मौसम में बड़ी चुनौती बन जाता है। सड़कें और पुल-पुलिया जलमग्न होने के कारण राशन से भरे वाहन गांवों तक नहीं पहुंच पाते। कई बार ग्रामीणों को राशन लेने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है, जबकि कुछ परिवारों को निर्धारित समय से काफी देर बाद खाद्यान्न मिल पाता है। इससे गरीब परिवारों के सामने खाद्य संकट जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।
बिजली गुल होने से बढ़ रही मुश्किलें
ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के कई गांवों में पिछले करीब दो महीनों से बिजली आपूर्ति बाधित है। बिजली नहीं होने के कारण रात का अधिकांश समय अंधेरे में गुजरता है। मोबाइल चार्ज करने, बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कामकाज और अन्य जरूरी गतिविधियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कई लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे गांवों तक जाना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।
मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट भी बड़ी समस्या
इन गांवों में संचार व्यवस्था भी बेहद कमजोर बनी हुई है। अधिकांश इलाकों में मोबाइल नेटवर्क या तो बहुत कमजोर रहता है या बिल्कुल उपलब्ध नहीं होता। इंटरनेट सेवा भी प्रभावित रहती है, जिससे लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने, ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाने और आपात स्थिति में संपर्क करने में कठिनाई होती है। डिजिटल सेवाओं की कमी ग्रामीणों की समस्याओं को और बढ़ा देती है।
स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचना बना चुनौतीपूर्ण
बारिश के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित होती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित रूप से गांवों तक नहीं पहुंच पातीं। बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इलाज के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। कई बार उफनती नदियों और नालों के कारण मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना जोखिम भरा हो जाता है, जिससे गंभीर परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं।
स्थायी समाधान की मांग कर रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष मानसून में यही स्थिति दोहराई जाती है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि गांवों में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति हो, बारिश शुरू होने से पहले पीडीएस राशन का पर्याप्त भंडारण किया जाए और स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल टीमों की नियमित तैनाती की जाए। साथ ही संपर्क मार्गों, पुलों और पुलियों का निर्माण कर गांवों को पूरे वर्ष आवागमन योग्य बनाया जाए, ताकि मानसून के दौरान ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।
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