अभिनेत्री कंगना रनौत के ‘जेनरेशन गटर’ वाले बयान पर अभिनेता सोनू सूद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में बोलते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में बहस तेज हो गई है।
अभिनेत्री कंगना रनौत के ‘जेनरेशन गटर’ वाले बयान पर अभिनेता सोनू सूद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में बोलते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में बहस तेज हो गई है।

Sonu Sood on Kangana: फिल्म अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत के हालिया बयानों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलनों के संदर्भ में कंगना द्वारा की गई टिप्पणियों पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर विवाद गहरा गया है। इसी बीच अभिनेता सोनू सूद ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी और सार्वजनिक जीवन में शब्दों के चयन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।


एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब सोनू सूद से कंगना रनौत के विवादित बयान के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में ऐसा बयान दिया गया है, तो यह उचित नहीं है। सोनू सूद ने कहा कि सार्वजनिक मंच पर बोलते समय हर व्यक्ति को अपने शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि कही गई बात का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

सोनू सूद ने कहा कि समाज में हमेशा यह सीख दी जाती है कि व्यक्ति को “तोल-मोल कर बोलना” चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की हर बात लाखों लोग सुनते और समझते हैं। इसलिए किसी भी वर्ग, समुदाय या युवाओं के बारे में टिप्पणी करते समय जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता का सम्मान करना हर सार्वजनिक व्यक्ति का दायित्व है।
अभिनेता ने आगे कहा कि युवाओं का किसी भी कलाकार के करियर में महत्वपूर्ण योगदान होता है। उनके अनुसार, दर्शकों का प्यार और समर्थन ही किसी अभिनेता को सफलता दिलाता है। उन्होंने कहा कि जब तक लोग किसी कलाकार के साथ जुड़े रहते हैं, तब तक उसका अस्तित्व और लोकप्रियता बनी रहती है। इसलिए समाज के सभी वर्गों, खासकर युवाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखना जरूरी है।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कंगना रनौत ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरों और प्रदर्शनकारियों को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की। इसके बाद उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कुछ महिला प्रदर्शनकारियों का उल्लेख करते हुए उन्हें लेकर विवादित शब्दों का प्रयोग किया। इन टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली और कई लोगों ने उनके बयान पर आपत्ति जताई।

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कंगना रनौत ने कुछ युवतियों के व्यवहार और जीवनशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे स्वतंत्र महिलाओं की नकल करने की कोशिश करती हैं। उन्होंने लिखा कि आत्मनिर्भर महिलाएं अपने फैसले स्वयं लेती हैं और अपनी जिम्मेदारियां भी खुद निभाती हैं। इसी पोस्ट में उन्होंने कुछ महिलाओं के लिए एक विवादित शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई।
कंगना रनौत की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि कई यूजर्स ने उनकी भाषा और शब्दों के चयन पर सवाल उठाए। महिला संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने भी इस तरह की टिप्पणियों को लेकर चिंता व्यक्त की। वहीं, कई लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों से संयमित भाषा के इस्तेमाल की अपेक्षा जताई।
इस पूरे विवाद के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं और कलाकारों को अपने बयानों में कितनी सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावशाली व्यक्तियों की बातों का समाज पर व्यापक असर पड़ता है, इसलिए किसी भी वर्ग या समुदाय के बारे में टिप्पणी करते समय संतुलित और जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करना आवश्यक है। फिलहाल कंगना रनौत के बयान और उस पर सोनू सूद की प्रतिक्रिया दोनों ही सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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