Assam Floods: असम में भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों को आर्थिक राहत देने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से ऐसी व्यवस्था करने की घोषणा की है, जिससे बाढ़ प्रभावित परिवारों और छोटे कारोबारियों को राहत मिल सके। सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों पर वित्तीय बोझ कम करना और उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करना है।

EMI चुकाने के लिए मिलेगा अधिक समय
सरकार द्वारा घोषित राहत उपायों के तहत बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए ऋण पुनर्भुगतान (Loan Repayment) की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अब कर्ज की प्रकृति और उधारकर्ता की स्थिति को देखते हुए ऋण चुकाने की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर अधिकतम सात वर्ष तक की जा सकेगी। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी आय बाढ़ के कारण प्रभावित हुई है और जो समय पर अपनी मासिक किस्त (EMI) जमा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

छोटे कारोबारियों को मिलेगा अतिरिक्त लोन
बाढ़ के कारण जिन छोटे दुकानदारों और व्यापारियों का कारोबार पूरी तरह प्रभावित हुआ है, उनके लिए भी विशेष सहायता की घोषणा की गई है। सरकार के अनुसार, ऐसे पात्र व्यापारियों को बिना किसी अतिरिक्त गारंटी के उनके मौजूदा लोन खाते में 10,000 रुपये तक की अतिरिक्त ऋण राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम का उद्देश्य छोटे व्यापारियों को फिर से अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद करना है, ताकि वे जल्द सामान्य आर्थिक गतिविधियों में लौट सकें।
बैंक करेंगे व्यक्तिगत स्थिति का मूल्यांकन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी राहत सुविधाएं स्वतः नहीं मिलेंगी। बैंक प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति या कारोबारी की आर्थिक स्थिति और नुकसान का अलग-अलग आकलन करेंगे। समीक्षा के बाद पात्र लाभार्थियों को राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन लोगों से, जिनकी आर्थिक स्थिति सामान्य है, अपनी EMI नियमित रूप से जमा करने की अपील भी की है, ताकि बैंकिंग व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंच सके।
बाढ़ से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 80 पहुंचा
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में शिवसागर जिले में डूबने से दो और लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही इस वर्ष के मानसून सीजन में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। लगातार हो रही बारिश और जलभराव ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
अब भी लाखों लोग बाढ़ की चपेट में
ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के चार जिले अभी भी बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। लगभग 2.12 लाख लोग इस आपदा का सामना कर रहे हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित चराईदेव जिला है, जहां करीब 80 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके बाद शिवसागर और जोरहाट जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग राहत और पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई गांव अब भी जलमग्न हैं और सामान्य जीवन पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है।
112 राहत शिविरों में हजारों लोगों को मिल रही सहायता
हालांकि पिछले कुछ दिनों की तुलना में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है, लेकिन प्रशासन अभी भी पूरी तरह सतर्क है। राज्य सरकार वर्तमान में 112 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित कर रही है। इन शिविरों में 75 हजार से अधिक लोगों को अस्थायी आश्रय, भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों तक सहायता पहुंचाने में जुटी हुई हैं।
केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने केंद्र सरकार से असम के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस बार की बाढ़ सामान्य प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि अत्यधिक तीव्रता वाली असामान्य आपदा रही है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया है कि इस बाढ़ को विशेष श्रेणी की प्राकृतिक आपदा घोषित किया जाए, ताकि राज्य को बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सके। सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय जारी है।
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