Acharya Pramod Krishnam : कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने रविवार को भारतीय शिक्षा व्यवस्था में गुरुकुल परंपरा को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों से जुड़े हुए आदर्श नागरिक बनें, तो उन्हें गुरुकुल जैसी शिक्षा प्रणाली से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को भारतीय संस्कार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा मिलना भी बेहद जरूरी है।आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने संबोधन के दौरान एक विवादित टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि बच्चों को “कॉकरोच” बनने से बचाने के लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति की ओर लौटना जरूरी है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।

मुरादाबाद में गुरुकुल उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे आचार्य
आचार्य प्रमोद कृष्णम उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यह कार्यक्रम सुधांशु महाराज के सानिध्य में स्थापित किए गए एक गुरुकुल के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति और शिक्षा पर अपने विचार रखे।उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, सभ्यता और सनातन परंपराओं से है। नई पीढ़ी को इन मूल्यों से जोड़ना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल केवल शिक्षा देने का स्थान नहीं बल्कि जीवन जीने की सही दिशा दिखाने वाली व्यवस्था है।

स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद के आदर्शों का दिया उदाहरण
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि यदि वे अपने बच्चों को स्वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद सरस्वती और महर्षि दधीचि जैसे महान व्यक्तित्वों के आदर्शों पर चलते देखना चाहते हैं तो उन्हें गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना चाहिए।उन्होंने कहा कि बच्चों में अनुशासन, संस्कार, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए ऐसी शिक्षा जरूरी है। उनके अनुसार केवल किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को जीवन मूल्यों की शिक्षा भी मिलनी चाहिए।
भगवान शिव पर टिप्पणी मामले में जताई नाराजगी
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कई राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। भगवान शिव को लेकर मौलाना जरजिस की कथित टिप्पणी पर उन्होंने नाराजगी जताई।उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति किसी भी धर्म या आस्था के प्रतीकों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करता है, उसे वह मौलाना मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान होना चाहिए और किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली भाषा से बचना चाहिए।
पप्पू यादव के भगवा पहनने पर साधा निशाना
संसद परिसर के बाहर सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्र पहनने के मामले पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी को अभिनय का शौक है तो वह रामलीला में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा सकता है, लेकिन सनातन परंपराओं का मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए।उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि रामलीला में कालनेमि, खर-दूषण, मेघनाथ या रावण जैसे किरदार निभाने के लिए मंच उपलब्ध है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।

कॉकरोच आंदोलन और प्रधानमंत्री की माफी पर बोले आचार्य
कॉकरोच पार्टी के आंदोलन को लेकर पूछे गए सवाल पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे हुड़दंग करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलनों से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।वहीं, प्रधानमंत्री द्वारा माफी मांगने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री के बड़े और उदार हृदय को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े नेता का विनम्र व्यवहार उसकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को दिखाता है।
वंदे मातरम् बयान पर ओवैसी को दिया जवाब
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के वंदे मातरम् से जुड़े बयान पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार सच्चा मुसलमान भी देश के प्रति सम्मान रखते हुए वंदे मातरम् कह सकता है।उन्होंने राष्ट्र और संस्कृति के प्रति सम्मान को सभी नागरिकों की जिम्मेदारी बताया। आचार्य के इन बयानों के बाद गुरुकुल शिक्षा, सनातन संस्कृति और राजनीतिक मुद्दों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
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