Sawan 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने लोगों से जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता को जनआंदोलन बनाने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने यह संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए श्रावण महीने के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल पूजा-अर्चना का समय नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति अपने दायित्व निभाने का भी अवसर है।

श्रावण नवसृजन और लोकमंगल का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि श्रावण मास लोकमंगल, श्रम के सम्मान और सामूहिकता का प्रतीक माना जाता है। इस मौसम में प्रकृति नई ऊर्जा के साथ जीवन का संदेश देती है और किसानों की मेहनत हरियाली तथा समृद्धि के रूप में दिखाई देने लगती है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में प्रकृति और आध्यात्मिकता का गहरा संबंध है तथा श्रावण में भगवान शिव की आराधना मनुष्य को संयम, सेवा और समरसता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है।

भगवान शिव से मिलता है प्रकृति संरक्षण का संदेश
सीएम योगी ने भगवान शिव के स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष का पान करना उनके सर्वोच्च त्याग और सृष्टि की रक्षा का प्रतीक है। शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा भी इसी त्याग, कृतज्ञता और लोककल्याण की भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर चंद्रमा, गले में सर्प और नंदी का साथ हमें प्रकृति के साथ संतुलित और सहअस्तित्वपूर्ण जीवन जीने की सीख देता है।
हरियाली और वर्षा से खिल उठता है जीवन
मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्येष्ठ और आषाढ़ की भीषण गर्मी के बाद जब श्रावण की वर्षा धरती को स्पर्श करती है, तो वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। मिट्टी की सोंधी खुशबू, चारों ओर फैली हरियाली, लबालब बहती नदियां और नाचते हुए मोर प्रकृति के उल्लास का सुंदर दृश्य प्रस्तुत करते हैं। यह मौसम केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता भी लेकर आता है।
श्रावण में बढ़ती है सामाजिक एकता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गांवों में धान की रोपाई के बाद सामूहिक श्रम और सहभोज की परंपरा सामाजिक एकता का बेहतरीन उदाहरण है। वहीं शहरों और गांवों के शिवालयों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ सेवा, स्वच्छता और सामाजिक सहयोग की भावना को मजबूत करती है। उनके अनुसार श्रावण का महीना समाज को जोड़ने और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है।

जल संरक्षण को लेकर सरकार की पहल
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते जलवायु परिवर्तन और भूजल के अत्यधिक दोहन को देखते हुए जल बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सरकार लगातार जल संरक्षण से जुड़े अभियान चला रही है, लेकिन इसमें जनभागीदारी सबसे अहम भूमिका निभाती है।
लखनऊ की पहल को बताया प्रेरणादायक
सीएम योगी ने अपने संदेश में लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि वहां आरओ और एयर कंडीशनर से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 50 हजार लीटर पानी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली से जोड़कर भूजल पुनर्भरण में उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस पहल को सराहते हुए कहा कि प्रकृति से जितना लें, उतना ही उसे लौटाने का संकल्प भी हर नागरिक को लेना चाहिए।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का लिया जाए संकल्प
अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से श्रावण मास को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का पर्व बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूंद पानी का सम्मान करें, अधिक से अधिक पौधे लगाएं और उनकी सुरक्षा का संकल्प लें। मुख्यमंत्री के अनुसार यही श्रावण का वास्तविक संदेश है और यही समृद्ध, सुरक्षित तथा विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला भी बनेगा।
Read More : Usmanpur Roof Collapse: दिल्ली में घर की छत गिरी, दंपती की मौत, बेटा चमत्कारिक रूप से बचा












