Asian Games Hockey : एशियाई खेलों में भारत के खिलाफ मुकाबले की तैयारी कर रही इंडोनेशिया की युवा हॉकी टीम के लिए बॉलीवुड फिल्म ‘चक दे इंडिया’ खास प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। खिलाड़ियों का मानना है कि फिल्म ने उन्हें यह विश्वास दिया कि कमजोर मानी जाने वाली टीम भी मेहनत, एकजुटता और आत्मविश्वास के दम पर बड़े मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
शाहरुख खान की फिल्म के दीवाने फर्डियन
इंडोनेशिया के मिडफील्डर फर्डियन फातुर रहमान वर्ष 2007 में रिलीज हुई शाहरुख खान अभिनीत ‘चक दे इंडिया’ को कई बार देख चुके हैं। हॉकी पर आधारित इस फिल्म की कहानी और उसके प्रेरक संवादों ने रहमान पर खास प्रभाव डाला है। उनके लिए फिल्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि खेल और टीम भावना को समझने की प्रेरणा भी है।
फिल्म की कहानी ने खिलाड़ियों को दिया आत्मविश्वास
‘चक दे इंडिया’ में दिखाया गया है कि मुश्किल परिस्थितियों से जूझती महिला हॉकी टीम किस तरह मेहनत और एकजुटता के जरिए विश्व चैंपियन बनती है। फिल्म में कोच कबीर खान की भूमिका भी अहम है, जो बिखरी हुई टीम को एकजुट करके उसे बड़ी सफलता तक पहुंचाते हैं। यही संदेश इंडोनेशिया के खिलाड़ियों को भी प्रेरित करता है।
इंडोनेशिया के कई खिलाड़ियों ने देखी फिल्म
टीम के एक अन्य खिलाड़ी फिरदौस मुहम्मद ने भी ‘चक दे इंडिया’ देखी है। इंडोनेशिया हॉकी टीम के लगभग सभी खिलाड़ी कम से कम एक बार यह फिल्म देख चुके हैं। भारतीय हॉकी और बॉलीवुड फिल्मों की लोकप्रियता ने दोनों देशों के बीच खेल से जुड़ी एक दिलचस्प कड़ी भी बनाई है।
20 सितंबर को भारत से होगी पहली भिड़ंत
इंडोनेशिया को एशियाई खेलों में 20 सितंबर को पूल ए के अपने शुरुआती मुकाबले में गत चैंपियन भारत का सामना करना है। भारतीय टीम एशियाई हॉकी में मजबूत दावेदारों में शामिल है, ऐसे में इंडोनेशिया के युवा खिलाड़ियों के सामने बड़ी चुनौती होगी। टीम इस मुकाबले के लिए अपनी रणनीति और तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटी है।
कोच कबीर खान का संवाद रहमान को याद
हांगझोउ एशियाई खेलों में 2023 में हिस्सा ले चुके फर्डियन फातुर रहमान को फिल्म का शुरुआती रोल कॉल आज भी याद है। इसमें कोच कबीर खान खिलाड़ियों से उनके राज्य के बारे में पूछते हैं और फिर टीम को एक देश के लिए खेलने का संदेश देते हैं। रहमान के मुताबिक यह दृश्य उनके दिमाग में गहराई से छप गया।
सुराबाया में बॉलीवुड का खास क्रेज
रहमान ने बताया कि वह इंडोनेशिया के सुराबाया शहर से हैं, जहां बॉलीवुड फिल्मों को काफी पसंद किया जाता है। उन्होंने कहा कि हॉकी पर बनी ‘चक दे इंडिया’ आज भी वहां देखी जाती है। फिल्म में टीम भावना, संघर्ष और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश उन्हें विशेष रूप से प्रेरित करता है।
70 मिनट का डायलॉग भी पसंदीदा
पिछले पांच साल से आउटडोर और इंडोर हॉकी खेलने वाले फिरदौस मुहम्मद को फिल्म का ’70 मिनट’ वाला प्रेरक भाषण सबसे ज्यादा पसंद है। फिल्म में कोच कबीर खान खिलाड़ियों को मुकाबले के निर्णायक समय में पूरी ताकत लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। यह संवाद खेल प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय रहा है।
भारत के खिलाफ मिलेंगे सिर्फ 60 मिनट
फिल्म में भले ही ’70 मिनट’ का जिक्र हो, लेकिन इंडोनेशिया के खिलाड़ियों के सामने भारत के खिलाफ वास्तविक मुकाबला 60 मिनट का होगा। आधुनिक हॉकी चार क्वार्टर में खेली जाती है और प्रत्येक क्वार्टर 15 मिनट का होता है। यानी इंडोनेशिया को कुल 60 मिनट में अपनी क्षमता साबित करनी होगी।
फिल्म नहीं, मैदान पर प्रदर्शन होगा जरूरी
भारत के खिलाफ मुकाबले में इंडोनेशिया के खिलाड़ियों के पास किसी फिल्मी कहानी, कोच कबीर खान या प्रेरक भाषण का सहारा नहीं होगा। मैदान पर उन्हें अपनी रणनीति, फिटनेस, अनुशासन और टीमवर्क के दम पर खेलना होगा। ‘चक दे इंडिया’ से मिली प्रेरणा उनके आत्मविश्वास को जरूर बढ़ा सकती है, लेकिन असली परीक्षा मुकाबले के 60 मिनट में होगी।
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