Stipend Strike : शासकीय मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड में सम्मानजनक बढ़ोतरी की मांग को लेकर 6 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल परिसर में इंटर्न डॉक्टर धरने पर बैठे हैं और शासन से अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं। इंटर्न्स का कहना है कि वे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन उनके कार्य के अनुरूप उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड बेहद कम है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

धरने पर बैठे इंटर्न डॉक्टर
मेडिकल कॉलेज परिसर में बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल आर्थिक लाभ की नहीं, बल्कि उनके कार्य और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड की है। इंटर्न्स का कहना है कि वे मरीजों की सेवा में लगातार सक्रिय रहते हैं और अस्पताल की नियमित व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


24 से 36 घंटे तक लगातार करनी पड़ती है ड्यूटी
इंटर्न डॉक्टरों के अनुसार उन्हें कई बार लगातार 24-24 घंटे और 36-36 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। लंबे समय तक आपातकालीन सेवाओं, वार्ड, ओपीडी और अन्य विभागों में कार्य करने के बावजूद उन्हें प्रतिमाह केवल 15,900 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है। उनका कहना है कि मौजूदा महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है।

स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग
हड़ताली इंटर्न्स ने शासन को सौंपे गए मांग पत्र में मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा पूरी करने के दौरान इंटर्नशिप सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें कार्य का दबाव भी सबसे अधिक रहता है। ऐसे में उन्हें उचित आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
पड़ोसी राज्यों का दिया उदाहरण
इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांग के समर्थन में अन्य राज्यों का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि ओडिशा में मेडिकल इंटर्न्स को 44,319 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाता है, जबकि देश के कई अन्य राज्यों में भी करीब 30 हजार रुपये या उससे अधिक का भुगतान किया जा रहा है। उनका तर्क है कि जब कार्य का स्वरूप लगभग समान है तो छत्तीसगढ़ में इतनी कम राशि देना उचित नहीं है।
शासन से जल्द निर्णय की उम्मीद
प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और वे सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने संबंधी ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।











