Ambikapur News : अंबिकापुर से स्वास्थ्य व्यवस्था और आयुष्मान योजना से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जशपुर जिले के एक दिवंगत आरक्षक को उसकी मौत के 37 दिन बाद आयुष्मान सारथी के माध्यम से ऐसा संदेश मिला, जिसमें उसे स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौटने की जानकारी दी गई। संदेश में अस्पताल में भर्ती होने और डिस्चार्ज होने की तारीख भी दर्ज थी। मृत आरक्षक की पत्नी ने जब अपने मोबाइल पर यह मैसेज देखा तो वह हैरान रह गईं। उनका कहना है कि पति की मृत्यु के बाद इस तरह का संदेश मिलना बेहद पीड़ादायक है।

26 जून को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुए थे भर्ती
जशपुर जिले के ग्राम कटंगखार निवासी देवनारायण राम पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर कार्यरत थे। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें इलाज के लिए 26 जून 2026 को अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया गया कि उनका उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत किया जा रहा था। इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और 30 जून को अस्पताल में ही उनकी मृत्यु हो गई।

मौत के बाद जारी हुआ मृत्यु प्रमाण पत्र
आरक्षक देवनारायण राम की मृत्यु के बाद अस्पताल की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई और उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। परिवार ने भी उनकी मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार समेत अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं। परिवार के लिए यह मामला वहीं समाप्त हो गया था। लेकिन करीब 37 दिन बाद मृत आरक्षक के मोबाइल पर आया एक संदेश पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े कर गया।
6 अगस्त की डिस्चार्ज तारीख देखकर पत्नी रह गईं हैरान
आयुष्मान सारथी के जरिए भेजे गए संदेश में बताया गया कि मरीज स्वस्थ होकर घर लौट रहा है। संदेश में अस्पताल में भर्ती होने की तारीख 26 जून और डिस्चार्ज की तारीख 6 अगस्त दर्ज बताई गई। यानी रिकॉर्ड के अनुसार मरीज को करीब 42 दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया। सबसे हैरानी की बात यह थी कि संबंधित मरीज की मृत्यु 30 जून को ही हो चुकी थी।
नर्स पत्नी ने उठाए गंभीर सवाल
मृत आरक्षक की पत्नी सीमा कुजूर जशपुर जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि उनके पति की मौत 30 जून को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हो गई थी। इसके बावजूद आयुष्मान योजना से जुड़े सिस्टम में उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती दिखाया गया। उनके मोबाइल पर आया संदेश परिवार के लिए बेहद भावनात्मक और पीड़ादायक था।

‘मृत व्यक्ति को जीवित दिखाना’ बताया गंभीर मामला
सीमा कुजूर ने सवाल उठाया कि अगर मरीज की मृत्यु 30 जून को हो चुकी थी, तो फिर आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड में उसे 42 दिनों तक भर्ती कैसे दिखाया गया। उनका कहना है कि यह केवल तकनीकी त्रुटि है या फिर योजना से जुड़ी किसी गंभीर गड़बड़ी का संकेत, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड पर भी सवाल
परिवार का आरोप है कि मृत आरक्षक के नाम पर अस्पताल में लंबे समय तक इलाज जारी रहने जैसा रिकॉर्ड सामने आना गंभीर विषय है। यदि यह केवल सिस्टम की तकनीकी समस्या है तो इसकी वजह सामने आनी चाहिए और यदि रिकॉर्ड में किसी स्तर पर गलत जानकारी दर्ज की गई है, तो उसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए। परिवार का कहना है कि ऐसी घटनाएं आम लोगों के स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी योजनाओं पर भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने ऑटो-जेनरेटेड मैसेज बताया
मामले में मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के सीएस आरसी आर्या ने अलग जानकारी दी। उनका कहना है कि मरीज के मोबाइल पर आया संदेश अस्पताल की ओर से सीधे नहीं भेजा गया था। उन्होंने इसे ऑटो-जेनरेटेड मैसेज बताया। उनके अनुसार, मरीज की मृत्यु के बाद 30 जून को ही उसका आयुष्मान कार्ड ब्लॉक कर दिया गया था।
सीएस ने बिलिंग को लेकर भी दी जानकारी
आरसी आर्या के मुताबिक, मृत आरक्षक आईसीयू में भर्ती था और उसके आयुष्मान कार्ड से केवल पांच दिनों का ही बिल कटा है। उनका कहना है कि अस्पताल के स्तर पर मरीज को 42 दिनों तक भर्ती दिखाकर बिलिंग किए जाने की बात सही नहीं है। हालांकि, मोबाइल पर इस तरह का संदेश पहुंचना अपने आप में गंभीर और असहज स्थिति है।
संबंधित विभाग को पत्र लिखने की तैयारी
अस्पताल के सीएस ने कहा कि किसी भी परिवार के लिए मरीज की मृत्यु के बाद उसे स्वस्थ होकर घर लौटने का संदेश मिलना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले की जानकारी रायपुर स्थित संबंधित विभाग को दी जाएगी और इस संबंध में पत्र भी लिखा जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संदेश किस सिस्टम से और किस आधार पर जनरेट हुआ।

जांच से ही सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आरक्षक की मृत्यु 30 जून को हो गई थी और उनका आयुष्मान कार्ड भी उसी दिन ब्लॉक कर दिया गया था, तो 6 अगस्त की डिस्चार्ज तारीख वाला संदेश कैसे जारी हुआ। क्या यह केवल तकनीकी गड़बड़ी थी या रिकॉर्ड अपडेट में किसी स्तर पर चूक हुई, इसका जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। परिवार ने मामले की गंभीरता से जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
परिवार ने पारदर्शी जांच की मांग की
मृत आरक्षक की पत्नी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने पति के मामले की सच्चाई जानना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता और सटीकता बेहद जरूरी है। अब संबंधित विभाग की जांच और रिपोर्ट पर सभी की नजर है।











