पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान के बाद सियासी घमासान और तेज हो गया है। पी. चिदंबरम के बाद अब महबूबा मुफ्ती ने भी खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया है। उन्होंने अनुच्छेद 370 के समर्थन की बात कही। आखिर किरेन रिजिजू की किस पोस्ट पर महबूबा ने यह जवाब दिया?
पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान के बाद सियासी घमासान और तेज हो गया है। पी. चिदंबरम के बाद अब महबूबा मुफ्ती ने भी खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया है। उन्होंने अनुच्छेद 370 के समर्थन की बात कही। आखिर किरेन रिजिजू की किस पोस्ट पर महबूबा ने यह जवाब दिया?

Dimaagi Naxal : 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए नक्सलवाद और माओवाद को समाज के लिए गंभीर चुनौती और अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक नई चुनौती को लेकर देश को सतर्क किया। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसी मानसिकता रखने वाले लोग समाज में हिंसा और अराजकता फैलाने के अवसर तलाश सकते हैं।


प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस शुरू हो गई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। चिदंबरम की इस टिप्पणी के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और माओवादी विचारधारा से जोड़ते हुए कांग्रेस की सोच पर सवाल उठाए।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कह दिया। उन्होंने इसके साथ ही अनुच्छेद 370 को लेकर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए उसका समर्थन किया। उनके बयान के बाद बीजेपी और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रधानमंत्री के बयान के राजनीतिक और वैचारिक अर्थ को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
चिदंबरम के बयान पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चिदंबरम की टिप्पणी को शर्मनाक और अशोभनीय बताया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो व्यक्ति देश का गृह मंत्री रह चुका है, उससे इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने की राजनीतिक इच्छा के चलते पार्टी माओवादी विचारधारा को कथित तौर पर बौद्धिक समर्थन दे रही है।
विवाद बढ़ने के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने पूरे विपक्ष को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा है। रिजिजू ने प्रधानमंत्री के बयान को कुछ विशेष विचारधाराओं और गतिविधियों से जोड़ते हुए इसका अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि इस शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया गया है जो माओवाद का समर्थन करते हैं और संविधान की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करते।

किरेन रिजिजू ने अपने बयान में चार प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि माओवादी विचारधारा का समर्थन करने वाले, संविधान को खारिज करने वाले और अलगाववादियों के साथ खड़े होने वाले लोगों को इस संदर्भ में देखा गया है। इसके अलावा अनुच्छेद 370 की बहाली की वकालत करने तथा देश की एकता और अखंडता के खिलाफ सोच रखने वाली मानसिकता को भी उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान से जोड़ा। बीजेपी का कहना है कि इसे पूरे विपक्ष पर टिप्पणी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस पर एक और हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् गायन के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी के कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठाए। भंडारी ने इस घटनाक्रम को भी उसी मानसिकता से जोड़ने की कोशिश की, जिसका जिक्र बीजेपी नेता प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ बयान के संदर्भ में कर रहे हैं।
‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय सुरक्षा, माओवाद, संविधान और देश की एकता-अखंडता जैसे मुद्दों तक पहुंच गया है। कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है। एक तरफ बीजेपी इसे माओवादी विचारधारा के खिलाफ चेतावनी बता रही है, जबकि विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
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