Lotus Farming : भारत में पारंपरिक फसलों की खेती की लागत लगातार बढ़ने के बीच कई किसान अब बागवानी और नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसी ही लाभदायक फसलों में कमल की खेती भी शामिल हो गई है। कभी तालाबों और झीलों तक सीमित रहने वाला कमल अब आधुनिक तकनीक की मदद से खेतों में भी उगाया जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि फूल से लेकर पत्तियां, जड़ और बीज तक बाजार में बिकते हैं।
खेत को छोटे तालाब में बदलना होता है
कमल की खेती शुरू करने से पहले सामान्य खेत को तालाबनुमा स्वरूप देना पड़ता है। इसके लिए चिकनी या दोमट मिट्टी वाला खेत उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि ऐसी मिट्टी पानी को लंबे समय तक रोकने में सक्षम होती है। खेत के चारों तरफ करीब तीन से चार फीट ऊंची मजबूत मेड़ तैयार की जाती है। इसके बाद खेत को लगभग डेढ़ से दो फीट गहरा किया जाता है।
जैविक खाद डालकर खेत तैयार करें
खेत की तैयारी के दौरान उसमें अच्छी मात्रा में गोबर की सड़ी हुई खाद और जैविक उर्वरक मिलाया जाता है। इसके बाद करीब एक से डेढ़ फीट पानी भर दिया जाता है। जब मिट्टी पानी के साथ मिलकर अच्छी तरह कीचड़ जैसी बन जाती है, तब कमल की रोपाई के लिए खेत तैयार माना जाता है। खेत में पानी का स्तर बनाए रखना इसकी खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कंद से रोपाई को माना जाता है बेहतर विकल्प
कमल की खेती बीज से भी की जा सकती है, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन के लिए कंद से रोपाई को अधिक प्रभावी माना जाता है। कंद से तैयार पौधे अपेक्षाकृत जल्दी विकसित होते हैं और उत्पादन शुरू कर देते हैं। सामान्य तौर पर फरवरी से अप्रैल के बीच रोपाई करना उपयुक्त माना जाता है। इस समय तापमान में बढ़ोतरी पौधों की वृद्धि के लिए अनुकूल रहती है।
कम देखभाल में शुरू हो जाता है फूलों का उत्पादन
कमल की फसल में सामान्य तौर पर बहुत ज्यादा कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसानों को मुख्य रूप से खेत में पानी का उचित स्तर बनाए रखने पर ध्यान देना होता है। लगभग एक फीट पानी बनाए रखना जरूरी माना जाता है। उचित देखभाल और अनुकूल मौसम मिलने पर रोपाई के करीब तीन से चार महीने बाद कमल के फूल दिखाई देने लगते हैं।
फूलों की बाजार में रहती है जबरदस्त मांग
कमल की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके अलग-अलग हिस्सों से किसान आय प्राप्त कर सकते हैं। पूजा-पाठ, धार्मिक कार्यक्रमों, त्योहारों और विशेष रूप से दीपावली तथा शादी-विवाह के अवसरों पर कमल के फूलों की मांग बढ़ जाती है। बाजार में एक फूल की कीमत गुणवत्ता और मांग के अनुसार लगभग 10 से 25 रुपये तक मिल सकती है।
कमल की जड़ और बीज भी देते हैं अतिरिक्त कमाई
कमल की जड़ों यानी कमल ककड़ी का इस्तेमाल सब्जी और अचार बनाने में किया जाता है। बाजार में इसकी कीमत लगभग 80 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। वहीं फूल सूखने के बाद मिलने वाले बीजों को कमल गट्टा कहा जाता है। इनका इस्तेमाल पूजा-पाठ और विभिन्न पारंपरिक उत्पादों में किया जाता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी का रास्ता मिलता है।
एक एकड़ में लाखों रुपये तक कमाई का दावा
एक एकड़ खेत में कमल की खेती शुरू करने के लिए खेत की खुदाई, कंद की खरीद और मजदूरी समेत शुरुआती लागत लगभग 35 से 50 हजार रुपये तक बताई जाती है। उत्पादन परिस्थितियों के अनुसार एक एकड़ से सालभर में करीब 30 से 40 हजार फूल प्राप्त होने का अनुमान है। फूल, कमल ककड़ी और बीज बेचकर खर्च निकालने के बाद किसान करीब 3.5 से 5 लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफे का लक्ष्य रख सकते हैं। हालांकि वास्तविक आय स्थानीय बाजार, उत्पादन, गुणवत्ता और बिक्री कीमत पर निर्भर करेगी।
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