CG Fake Transfer Scam : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा कथित फर्जी ट्रांसफर आदेश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। फर्जी दस्तावेज सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच में बीजेपी से जुड़े पदाधिकारियों के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
बीजेपी महामंत्री समेत चार लोगों की गिरफ्तारी
पलारी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बीजेपी जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी, जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल, ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन और रवि सेन को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
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गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने पदाधिकारियों पर की कार्रवाई
मामले में पार्टी पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने भी संगठनात्मक स्तर पर कार्रवाई की है। पार्टी ने जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और दोनों जिला उपाध्यक्षों को उनके पदों से हटा दिया है। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर पुलिस जांच और आगे सामने आने वाले तथ्यों के बाद ही स्पष्ट होगी।
CMHO के फर्जी हस्ताक्षर से बनाया गया आदेश
मामला रोहांसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से मोपर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कथित स्थानांतरण से जुड़ा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन के नाम पर एक ट्रांसफर आदेश तैयार किया गया था। इस दस्तावेज में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी CMHO डॉ. राजेश अवस्थी के हस्ताक्षर किए गए थे। विभाग को संदेह हुआ तो दस्तावेज की सत्यता की जांच कराई गई।
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व्हाट्सऐप के जरिए विभाग तक पहुंचा दस्तावेज
जानकारी के अनुसार, कथित फर्जी स्थानांतरण आदेश की एक प्रति 17 अगस्त 2026 को व्हाट्सऐप के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय तक पहुंची थी। दस्तावेज मिलने के बाद विभागीय स्तर पर इसकी जांच शुरू की गई। जांच में आदेश कूटरचित पाया गया। इसके अलावा, दस्तावेज पर मौजूद CMHO के हस्ताक्षर भी उनके वास्तविक और अधिकृत हस्ताक्षर से अलग पाए गए। इसके बाद मामले को पुलिस के हवाले किया गया।
शिकायत के बाद पलारी पुलिस ने दर्ज किया केस
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज वर्मा की शिकायत के आधार पर पलारी पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 318(4), 336(3), 337, 338, 340(2) और 3(5) के तहत अपराध कायम किया है। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने दस्तावेज तैयार करने और उसे विभाग तक पहुंचाने से जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी।
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ट्रांसफर के नाम पर एक लाख रुपये के लेनदेन का दावा
पलारी थाना प्रभारी रितेश तिवारी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच के दौरान ट्रांसफर कराने के नाम पर करीब एक लाख रुपये के कथित लेनदेन की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इस कथित रकम के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि पैसे किसने दिए, किसने लिए और कथित ट्रांसफर के लिए किस स्तर पर बातचीत हुई थी।
फर्जी आदेश के पीछे कौन है मास्टरमाइंड?
मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के तरीके को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि CMHO के हस्ताक्षर की नकल करके कथित फर्जी स्थानांतरण आदेश आखिर किसने तैयार किया। इसके पीछे किसी एक व्यक्ति की भूमिका थी या पूरा नेटवर्क काम कर रहा था, पुलिस इसकी जांच कर रही है। दस्तावेज तैयार करने और उसे आगे भेजने वाले व्यक्ति की पहचान भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुलिस खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ियां
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए मामले की सभी कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच में कथित आर्थिक लेनदेन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उसे स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह के किसी अन्य फर्जी आदेश को पहले भी तैयार किया गया था या नहीं।
आगे और गिरफ्तारियां संभव
फर्जी ट्रांसफर आदेश मामले में जांच अभी जारी है और पुलिस ने आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया है। यदि पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह मामला बलौदाबाजार में प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।
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