Nepal Flood Satellite Images : नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले और तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। प्लैनेट लैब्स की ओर से जारी ‘बिफोर एंड आफ्टर’ सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद की स्थिति का बड़ा अंतर दिखाई देता है। तस्वीरों में हरे-भरे गांव, सड़कें और कई बुनियादी ढांचे बाढ़ के बाद मलबे, गाद और पानी के बीच तब्दील नजर आ रहे हैं। कुछ इलाकों में बाढ़ का असर इतना व्यापक है कि सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
मृतकों की संख्या बढ़ी, सैकड़ों लोग अब भी लापता
ताजा जानकारी के अनुसार नेपाल में इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर करीब 160 तक पहुंच गई है। वहीं, बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में खराब मौसम और संचार व्यवस्था बाधित होने से राहत एवं बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। मनकामना घाटी और खड्गा भंज्यांग जैसे इलाकों तक बचाव दलों की पहुंच भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
रसुवा और तिब्बत सीमा पर बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
बुधवार सुबह मध्य नेपाल के तिब्बत सीमा से लगे जिलों में अचानक आई तेज बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। शहरों और गांवों में पानी और मलबे से भारी नुकसान हुआ है। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए, जबकि कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इससे स्थानीय परिवहन, बिजली और संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ा है।
पर्यटन और ट्रैकिंग रूट भी बाढ़ की चपेट में
रसुवा क्षेत्र नेपाल के प्रमुख पर्यटन और ट्रैकिंग इलाकों में शामिल है। अचानक आई बाढ़ के दौरान कई पर्यटक भी तेज बहाव की चपेट में आ गए। स्थानीय स्तर पर कई रास्ते और संपर्क मार्ग बाधित हुए हैं। राहत एजेंसियों के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पहाड़ी भूभाग, खराब मौसम और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण प्रभावित लोगों तक पहुंचना आसान नहीं है।
नेपाल में लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े
नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि फ्लैश फ्लड में 157 लोगों की मौत हुई है। वहीं, नेपाल सरकार के अनुसार करीब 500 लोग लापता हैं। दूसरी तरफ चीन के सरकारी CGTN न्यूज चैनल ने सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर के कारण कुल प्रभावित लोगों की संख्या को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
GLOF को माना जा रहा अचानक बाढ़ की बड़ी वजह
केंद्रीय जल आयोग और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स के अनुसार भारत-नेपाल सीमा से लगभग 160 किलोमीटर दूर रसुवागढ़ी के पास त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई। प्रारंभिक आकलन में इसके पीछे तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की आशंका जताई जा रही है। इसमें हिमनद से बनी झील के अचानक फटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से बहता है।
त्रिशूली नदी से भारत में बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा
त्रिशूली नदी आगे भारत में गंडक नदी के रूप में बहती है। इसी वजह से नेपाल में आई बाढ़ को लेकर भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ सीमावर्ती जिलों में संभावित बाढ़ की लहर को देखते हुए NDRF की टीमों को तैयार रखा गया है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और कुशीनगर जैसे क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
पीएम मोदी ने नेपाल को हरसंभव मदद का भरोसा दिया
नेपाल में हुई तबाही के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की। उन्होंने जनहानि पर गहरा दुख जताते हुए नेपाल के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में भारत नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने राहत और बचाव अभियानों में समन्वय बनाए रखने तथा हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया।
राहत और बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती
फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। कई क्षेत्रों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित स्थानों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। संचार व्यवस्था बाधित होने से लापता लोगों की जानकारी जुटाना भी मुश्किल है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को तलाशने, घायलों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की है।
सैटेलाइट तस्वीरों ने उजागर की आपदा की भयावहता
प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों ने इस आपदा से हुए नुकसान की गंभीरता को सामने ला दिया है। बाढ़ से पहले जहां आबादी वाले क्षेत्र और हरियाली नजर आती थी, वहीं बाद की तस्वीरों में बड़े पैमाने पर मलबा और गाद दिखाई दे रही है। इस भयावह घटना ने नेपाल के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ा दी है।
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