Study in USA : अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में अंडरग्रेजुएट पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में इस साल उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। Common App की 2025-26 एडमिशन साइकिल रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में फर्स्ट-ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए भारत से आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या 15 प्रतिशत घटकर 14,424 रह गई। यह गिरावट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कई वर्षों से भारतीय छात्रों के आवेदन लगातार बढ़ रहे थे।
चीन ने भारत पर फिर बनाई बढ़त
Common App के आंकड़ों में चीन अभी भी भारत से आगे बना हुआ है। 2025-26 एडमिशन साइकिल में चीन से 18,435 फर्स्ट-ईयर इंटरनेशनल अंडरग्रेजुएट आवेदक रहे। हालांकि चीन के आवेदनों में भी लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई है। इसके बावजूद भारत में आई बड़ी गिरावट के कारण दोनों देशों के बीच अंतर फिर बढ़ गया। इस साल चीन से भारत की तुलना में 4,011 ज्यादा आवेदन दर्ज किए गए।
एक दशक में भारतीय आवेदनों में जबरदस्त इजाफा
Common App के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की रुचि पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी थी। 2016-17 में भारत से लगभग 7,900 फर्स्ट-ईयर इंटरनेशनल आवेदक थे। यह संख्या 2017-18 में करीब 8,200 और 2018-19 में लगभग 8,600 पहुंची। 2019-20 में आवेदकों की संख्या बढ़कर करीब 9,400 हो गई।
2020 के बाद आवेदन तेजी से बढ़े
भारतीय छात्रों के आवेदन में असली तेजी 2020-21 के बाद देखने को मिली। इस दौरान संख्या करीब 12,500 तक पहुंच गई। 2021-22 में यह आंकड़ा लगभग 16,900 हो गया। 2022-23 में भी करीब 16,900 आवेदन दर्ज हुए। 2023-24 में मामूली गिरावट के साथ यह संख्या करीब 16,700 रही, जबकि 2024-25 में फिर लगभग 16,900 आवेदन आए। अब 2025-26 में आंकड़ा घटकर 14,424 रह गया है।
भारत और चीन के बीच पुराना अंतर फिर बढ़ा
करीब एक दशक पहले अमेरिका में अंडरग्रेजुएट आवेदन के मामले में चीन भारत से काफी आगे था। 2016-17 में चीन से लगभग 29,700 आवेदक थे, जबकि भारत से करीब 7,900 आवेदन आए थे। यानी चीन से आने वाले आवेदकों की संख्या भारत से करीब चार गुना थी। इसके बाद भारत के आवेदन तेजी से बढ़े और दोनों देशों के बीच अंतर लगातार कम होता गया।
2023-24 में दोनों देश काफी करीब पहुंचे
2023-24 तक भारत ने चीन के साथ आवेदन के अंतर को काफी कम कर लिया था। उस साल चीन से लगभग 17,600 और भारत से करीब 16,700 आवेदन आए थे। दोनों देशों के बीच अंतर लगभग 1,000 आवेदकों तक सिमट गया था। इससे संकेत मिल रहा था कि भारतीय छात्र जल्द ही अमेरिका में सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आवेदक समूह के रूप में चीन के बराबर पहुंच सकते हैं।
इस साल फिर बढ़ा 4 हजार से ज्यादा का अंतर
2025-26 में भारतीय आवेदनों में 15 प्रतिशत की गिरावट ने तस्वीर बदल दी है। अब चीन के 18,435 आवेदकों के मुकाबले भारत से केवल 14,424 आवेदन आए हैं। इस तरह दोनों देशों के बीच अंतर बढ़कर 4,011 हो गया है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जो बढ़त हासिल की थी, उसका एक हिस्सा इस साल की गिरावट से कम हुआ है।
एशिया से आने वाले अंतरराष्ट्रीय आवेदन भी घटे
भारत में आई कमी का असर एशिया से आने वाले कुल इंटरनेशनल अंडरग्रेजुएट आवेदनों पर भी पड़ा है। Common App के अनुसार 2024-25 में एशिया से लगभग 89,000 अंतरराष्ट्रीय आवेदन आए थे। 2025-26 में यह संख्या घटकर 79,287 रह गई। यानी एशिया से आवेदनों में लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के छात्रों की तस्वीर अलग
भारत से सीधे अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में आवेदन करने वाले छात्रों के आंकड़ों से अलग अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के घरेलू आवेदकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। Common App के मुताबिक भारतीय बैकग्राउंड बताने वाले घरेलू फर्स्ट-ईयर आवेदक 2016-17 में करीब 18,500 थे, जो 2025-26 में बढ़कर 40,949 हो गए। यानी लगभग एक दशक में यह संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई।
भारतीय मूल के घरेलू आवेदकों में लगातार बढ़ोतरी
वहीं चीन बैकग्राउंड वाले घरेलू आवेदकों की संख्या इसी अवधि में करीब 19,000 से बढ़कर 26,296 हुई। केवल पिछले वर्ष भारतीय बैकग्राउंड वाले घरेलू आवेदकों की संख्या में करीब 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि चीनी बैकग्राउंड वाले आवेदकों में सिर्फ 1 प्रतिशत बढ़ोतरी रही। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के छात्रों की अमेरिकी उच्च शिक्षा में भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।
Read More : Meta Child Safety : Instagram-Facebook पर बच्चों के लिए नई पाबंदियां, Meta ने लागू किए सख्त सुरक्षा नियम