Meta Child Safety : Instagram-Facebook पर बच्चों के लिए नई पाबंदियां, Meta ने लागू किए सख्त सुरक्षा नियम

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta Platforms ने अमेरिका में बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया सुरक्षा से जुड़े मुकदमों को खत्म करने के लिए बड़ा समझौता किया है। समझौते के तहत Meta को 16.68 अरब डॉलर तक का भुगतान करना होगा और Instagram-Facebook पर नाबालिगों के इस्तेमाल को लेकर कई सख्त बदलाव करने होंगे।

Meta Child Safety : सोशल मीडिया कंपनी Meta ने अमेरिका में बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मुकदमे को खत्म करने के लिए समझौता किया है। कंपनी पर आरोप लगाया गया था कि Facebook और Instagram के कुछ फीचर्स बच्चों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किए गए थे। समझौते के तहत Meta बड़ी रकम का भुगतान करेगी और नाबालिग यूजर्स की सुरक्षा के लिए अपने ऐप्स में कई महत्वपूर्ण बदलाव करेगी। हालांकि, कंपनी ने समझौते में किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है।

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2023 में कई अमेरिकी राज्यों ने दायर किया था मुकदमा

अमेरिका के कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने वर्ष 2023 में Meta के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। आरोप था कि Facebook और Instagram में ऐसे फीचर्स मौजूद हैं, जो बच्चों और किशोरों को जरूरत से ज्यादा समय तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं। राज्यों का दावा था कि इसका असर बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर पड़ सकता है। कंपनी पर माता-पिता और आम लोगों को संभावित जोखिमों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं देने का आरोप भी लगाया गया था।

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समझौते में अरबों डॉलर के भुगतान की बात

समझौते के तहत Meta की ओर से भुगतान की जाने वाली रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के मुताबिक राज्यों को करीब 17 अरब डॉलर तक मिल सकते हैं, जबकि Meta ने कुल भुगतान लगभग 18 अरब डॉलर बताया है। मीडिया रिपोर्टों में अधिकतम रकम करीब 16.68 अरब डॉलर बताई गई है। रकम का कुछ हिस्सा निश्चित है, जबकि अतिरिक्त भुगतान कुछ शर्तों से जुड़ा हुआ है।

Facebook और Instagram पर दो घंटे की डिफॉल्ट लिमिट

समझौते का सबसे बड़ा असर 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स पर पड़ सकता है। Facebook और Instagram पर मिलाकर रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट इस्तेमाल सीमा तय की जाएगी। अगर किशोर इस सीमा को हटाना चाहते हैं तो इसके लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। दोनों प्लेटफॉर्म पर बिताया गया समय इसी साझा दैनिक सीमा में शामिल किया जाएगा।

रात में छह घंटे तक सोशल मीडिया इस्तेमाल बंद

नाबालिग यूजर्स के लिए रात के समय भी इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रावधान है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक किशोर Facebook और Instagram का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों की नींद और दैनिक दिनचर्या पर सोशल मीडिया के संभावित प्रभाव को कम करना है।

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स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन रहेंगे बंद

नए बदलावों के तहत सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक डिफॉल्ट रूप से नोटिफिकेशन म्यूट रखने की व्यवस्था भी शामिल है। हालांकि जरूरी सुरक्षा अलर्ट और सीधे संदेश इससे प्रभावित नहीं होंगे। लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले किशोरों को बीच-बीच में ब्रेक लेने के लिए रिमाइंडर भी दिए जाएंगे।

उम्र की जांच और पैरेंटल कंट्रोल होंगे मजबूत

Meta बच्चों की उम्र की पहचान के लिए ज्यादा सख्त तकनीक लागू करने की तैयारी में है। इसके अलावा माता-पिता के लिए पैरेंटल कंट्रोल को आसान बनाया जाएगा। बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। कुछ ऐसे फीचर्स पर भी सीमाएं लगाई जा सकती हैं, जिनको लेकर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं सामने आती रही हैं।

YouTube और TikTok पर भी लागू होंगी शर्तें

समझौते की एक महत्वपूर्ण शर्त YouTube और TikTok से जुड़ी है। Meta का तर्क है कि केवल उसके प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से बच्चे दूसरे सोशल मीडिया ऐप्स पर जा सकते हैं। इसलिए समझौते की कुछ अतिरिक्त रकम दूसरे प्लेटफॉर्म द्वारा बच्चों की सुरक्षा के लिए समान कदम उठाने पर निर्भर होगी। इनमें दैनिक इस्तेमाल की सीमा, रात में रोक और उम्र सत्यापन जैसे उपाय शामिल हैं।

Meta ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया

Meta ने इन आरोपों से लगातार इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि किशोरों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि समझौते के बावजूद उसने किसी गलत काम या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है।

अदालत की मंजूरी के बाद लागू होंगी शर्तें

यह समझौता अभी अंतिम नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसे अदालत की मंजूरी मिलना जरूरी है। मंजूरी मिलने के बाद ही इसकी निर्धारित शर्तें प्रभावी होंगी। इसके बावजूद बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर यह समझौता सोशल मीडिया कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

भारत में भी बढ़ सकती है ऑनलाइन सुरक्षा पर बहस

अमेरिका में हुए इस समझौते का भारत में सीधे तौर पर कानूनी प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, इससे बच्चों के स्क्रीन टाइम, उम्र सत्यापन, डेटा सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल जैसे मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है। भारतीय बाजार में भी भविष्य में टेक कंपनियों से बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए ज्यादा मजबूत उपायों की अपेक्षा की जा सकती है।

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Chandan Das

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