Bilaspur High Court : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बिजली व्यवस्था और बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को पुराने आदेशों के पालन की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने CSPDCL के प्रबंध निदेशक (MD) और नगर निगम आयुक्त से टाइम-बाउंड रिपोर्ट पेश करने को कहा है। रिपोर्ट के माध्यम से अधिकारियों को यह बताना होगा कि पहले जारी किए गए निर्देशों पर अब तक कितना काम हुआ है और जो कार्य बाकी हैं, उन्हें कब तक पूरा किया जाएगा।
पुराने आदेशों के पालन का देना होगा पूरा हिसाब
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पिछले आदेशों पर हुई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। संबंधित अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट में पूरे किए जा चुके कार्यों के साथ लंबित कामों की स्थिति भी बतानी होगी। इसके अलावा प्रत्येक लंबित कार्य को पूरा करने के लिए निर्धारित समयसीमा का उल्लेख करना जरूरी होगा। कोर्ट ने निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों के नाम भी मांगे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस अधिकारी के स्तर पर काम की प्रगति पर नजर रखी जा रही है।
जर्जर बिजली खंभों को लेकर भी मांगी जानकारी
शहर में बिजली व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी अदालत ने विभाग से जवाब मांगा है। विशेष रूप से जर्जर और खराब बिजली खंभों को बदलने की कार्रवाई की स्थिति बताने को कहा गया है। CSPDCL को यह जानकारी देनी होगी कि अब तक कितने खंभों की पहचान की गई, कितने बदले गए और शेष खंभों को बदलने का काम कब तक पूरा होगा। इससे शहर की बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की स्थिति स्पष्ट होगी।
नए सब-स्टेशन की प्रक्रिया पर भी नजर
बिजली संकट को दूर करने के लिए प्रस्तावित नए सब-स्टेशन को लेकर भी हाईकोर्ट ने स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभाग को बताना होगा कि सब-स्टेशन की स्थापना की प्रक्रिया किस चरण में पहुंची है। इसके निर्माण, आवश्यक स्वीकृतियों और अन्य संबंधित कार्यों की समयसीमा की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल करने को कहा गया है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बिजली से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए केवल योजनाएं न बनें, बल्कि उन्हें तय समय में जमीन पर उतारा जाए।
जलभराव रोकने के लिए निगम ने बताया इंतजाम
बारिश के दौरान शहर में होने वाले जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों को लेकर भी अदालत ने नगर निगम से जानकारी ली। सुनवाई के दौरान निगम की ओर से बताया गया कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित किया जा रहा है। जलभराव वाले इलाकों में निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई। भारी बारिश के दौरान लोगों को परेशानी से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे इंतजामों पर भी नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर
हाईकोर्ट के रुख से स्पष्ट है कि शहर की समस्याओं को लेकर केवल आश्वासन देना पर्याप्त नहीं होगा। अदालत चाहती है कि लंबित कार्यों के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित हो और उनकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी जाए। इसी उद्देश्य से कोर्ट ने टाइम-बाउंड रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करना होगा कि कौन अधिकारी किस काम की निगरानी कर रहा है और उसे पूरा करने की संभावित तारीख क्या है।
12 अक्टूबर को फिर होगी मामले की सुनवाई
बिलासपुर में बिजली संकट और जलभराव से संबंधित इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। उस दौरान CSPDCL के MD और नगर निगम आयुक्त की ओर से अदालत में रिपोर्ट पेश की जा सकती है। रिपोर्ट में अब तक हुई कार्रवाई और लंबित कार्यों की प्रगति के आधार पर हाईकोर्ट आगे के निर्देश जारी कर सकता है। इससे शहर की बिजली व्यवस्था और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर प्रशासन पर जवाबदेही और बढ़ सकती है।
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