BRICS Summit 2026: डॉलर के दबदबे पर पीयूष गोयल का वार, लोकल करेंसी और UPI पर दिया जोर

BRICS सम्मेलन में भारत ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश दिया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और UPI के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की बात कही। उनके बयान को डॉलर के दबदबे और अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था में संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

BRICS Summit 2026 : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की अपील की है। उन्होंने सदस्य देशों से अपनी-अपनी भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने का आग्रह किया। गोयल के मुताबिक, इससे देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन आसान होगा और डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिलेगा। इसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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UPI को बताया भारत की डिजिटल ताकत

पीयूष गोयल ने भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI का उदाहरण देते हुए कहा कि देश ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में मजबूत व्यवस्था तैयार की है। उन्होंने बताया कि UPI के जरिए हर साल 250 अरब से अधिक लेनदेन होते हैं। वैश्विक स्तर पर होने वाले डिजिटल लेनदेन में भी इसकी हिस्सेदारी आधे से ज्यादा बताई गई है। उन्होंने कहा कि UPI की स्वीकार्यता अब 11 देशों तक पहुंच चुकी है।

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स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने पर जोर

गोयल ने BRICS सदस्य देशों से एक-दूसरे के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में किसी एक विदेशी मुद्रा पर निर्भरता घटाई जा सकती है। साथ ही, अलग-अलग देशों के भुगतान नेटवर्क को जोड़ने से सीमा पार डिजिटल लेनदेन अधिक तेज, आसान और प्रभावी बनाया जा सकता है।

मजबूत सप्लाई चेन के लिए बाजार खोलने की जरूरत

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ आपूर्ति शृंखला को भी मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए सदस्य देशों को एक-दूसरे के बाजारों में उत्पादों के लिए ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने होंगे। कच्चे माल, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य जरूरी वस्तुओं के लिए बाजार खोलने से आपूर्ति व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मजबूत सप्लाई चेन के लिए दोतरफा व्यापार आवश्यक है।

गैर-टैरिफ बाधाएं कम करने की मांग

गोयल ने व्यापार में मौजूद गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में ऐसी बाधाएं कारोबार की लागत को काफी बढ़ा देती हैं और यह खर्च कई बार शुल्क यानी टैरिफ से होने वाली लागत से भी अधिक हो सकता है। उन्होंने BRICS देशों से नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा माल की खेप को तेजी से मंजूरी देने में सहयोग की अपील की।

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कृषि से ऑटो सेक्टर तक सहयोग की संभावना

भारत ने BRICS के भीतर कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, ऑटो पार्ट्स और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं बताईं। गोयल ने कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। इससे सदस्य देशों के किसानों को खाद्य सुरक्षा और कृषि से जुड़ी चुनौतियों का मिलकर समाधान खोजने में मदद मिल सकती है।

पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने पर जोर

सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने की जरूरत भी उठाई गई। गोयल ने कहा कि BRICS देशों के पेशेवरों को एक-दूसरे के देशों में काम करने के लिए बेहतर सुविधा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही पेशेवर योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी काम किया जाना चाहिए।

रूस ने डॉलर निर्भरता घटाने का दिया उदाहरण

फोरम में रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने भी स्थानीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले रूसी निर्यात के भुगतान में डॉलर और यूरो की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत थी, जो अब लगभग 11 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने कहा कि रूस के लिए वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है।

BRICS ग्रेन एक्सचेंज का रूस ने रखा प्रस्ताव

रूस ने BRICS देशों के सामने ‘BRICS ग्रेन एक्सचेंज’ स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। इसका उद्देश्य कृषि जिंसों के व्यापार के लिए साझा मंच तैयार करना है, जहां उत्पादक, कारोबारी और खरीदार सीधे लेनदेन कर सकें। रेशेतनिकोव ने कहा कि BRICS देश दुनिया के बड़े कृषि उत्पादक और उपभोक्ता हैं, इसलिए रणनीतिक कृषि वस्तुओं के लिए स्वतंत्र कारोबारी तंत्र विकसित करना जरूरी है।

व्यापार वित्त की कमी को बताया बड़ी चुनौती

भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने वैश्विक व्यापार वित्त की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने अनुमानित वैश्विक कमी करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर बताई और कहा कि निर्यातकों को पक्के ऑर्डर तथा विश्वसनीय भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर कम लागत पर कार्यशील पूंजी उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगस्त 2026 में अपनाई गई जयपुर सहमति BRICS के साझा व्यापार तंत्र को आगे बढ़ाने का आधार बन सकती है, खासकर MSME के लिए वित्तीय बाधाएं घटाने में।

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Chandan Das

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