Kishau Dam Project : लंबे समय से लंबित किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा ने परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह बैठक 16 जून को हुई पिछली बैठक के करीब तीन महीने बाद हुई, जिसमें राज्यों ने परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर आगे बढ़ने की सहमति दी थी।
बैठक में मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
ताजा बैठक में अधिकांश राज्यों के मुख्यमंत्री स्वयं शामिल हुए। इसके अलावा संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन सहित गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। अब उम्मीद है कि राज्यों की सहमति के बाद परियोजना को मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
टोंस नदी पर बनेगा बहुउद्देशीय बांध
किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट उत्तराखंड में टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस, यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। परियोजना का उद्देश्य किशाऊ जलाशय में पानी का भंडारण करना है, जिसका इस्तेमाल सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ाकर नदी के पुनर्जीवन में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
छह राज्यों के बीच पानी और बिजली का बंटवारा
किशाऊ परियोजना कई वर्षों से विभिन्न कारणों से अटकी हुई थी। इसमें छह राज्यों की हिस्सेदारी है, इसलिए पानी के बंटवारे, बिजली उत्पादन और परियोजना की लागत जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे हैं। अब राज्यों के बीच इन विषयों पर सहमति बनने से परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता पहले की तुलना में काफी साफ हुआ है।
जल घटक की 90 फीसदी लागत केंद्र उठाएगा
राज्यों के बीच बनी सहमति के अनुसार, परियोजना के जल घटक की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। बाकी 10 प्रतिशत लागत छह संबंधित राज्यों के बीच साझा की जाएगी। करीब 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के वित्तीय ढांचे को लेकर सहमति बनना इसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हिमाचल के पानी और बिजली हिस्से पर बनी सहमति
बैठक में हिमाचल प्रदेश के पानी के हिस्से से जुड़े विवाद को सुलझाने के तरीके पर भी सहमति बनी। तय व्यवस्था के अनुसार हिमाचल प्रदेश के आवंटित पानी का हिस्सा दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान परियोजना के बिजली उत्पादन वाले हिस्से में हिमाचल प्रदेश की लागत का हिस्सा आपस में वहन करेंगे। इससे राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दा सुलझने की उम्मीद है।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश को मिलेगा ज्यादा पानी
परियोजना से कई राज्यों और दिल्ली को अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने की उम्मीद है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हरियाणा को करीब 836 क्यूसेक, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलने की संभावना है। इससे संबंधित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
यमुना के पुनर्जीवन में अहम भूमिका की उम्मीद
किशाऊ परियोजना को यमुना के पुनर्जीवन से भी जोड़ा जा रहा है। जलाशय में पानी को नियंत्रित तरीके से जमा करने और छोड़ने से यमुना में पानी का प्रवाह बढ़ाने का लक्ष्य है। अतिरिक्त स्वच्छ पानी उपलब्ध होने से नदी की स्थिति सुधारने में मदद मिल सकती है। साथ ही जलाशय सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन की जरूरतों को भी पूरा करेगा।
अब केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार
छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद अब परियोजना मंजूरी के अगले चरण में पहुंच गई है। उम्मीद है कि किशाऊ मल्टीपर्पज डैम प्रोजेक्ट को केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। यह समझौता जल सुरक्षा, सिंचाई, पनबिजली और यमुना पुनर्जीवन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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