India-Pakistan Tension : भारत और पाकिस्तान के बीच 15 सितंबर 2026 को उत्तरी अरब सागर में नौसैनिक जहाजों की टक्कर का मामला सामने आया। घटना के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया गया। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक पोत के संचालन को लेकर आपत्ति जताई, जबकि पाकिस्तान ने घटना के लिए भारतीय पोत की कथित गतिविधियों को जिम्मेदार बताया।
भारत ने पाकिस्तानी राजनयिक को किया तलब
भारत के विदेश मंत्रालय ने 16 सितंबर को नई दिल्ली में पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स साद अहमद वराइच को तलब किया। मंत्रालय ने पाकिस्तानी नौसैनिक पोत के व्यवहार को ‘अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर’ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए दोनों देशों की सैन्य इकाइयों को निर्धारित नियमों और संबंधित समझौतों का पालन करना चाहिए।
पाकिस्तान ने भी भारतीय राजनयिक को बुलाया
भारत के विरोध के बाद पाकिस्तान ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर घटना को लेकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया। पाकिस्तान का दावा है कि भारतीय नौसैनिक पोत ने उसके जहाज के बेहद करीब आकर आक्रामक तरीके से संचालन किया, जिसके बाद दोनों पोतों के बीच संपर्क हुआ।
घटना को लेकर दोनों देशों के दावे अलग
घटना के कारणों पर भारत और पाकिस्तान के आधिकारिक दावे एक-दूसरे से अलग हैं। भारत के अनुसार, पाकिस्तानी पोत तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया और असुरक्षित तरीके से संचालन के कारण टक्कर हुई। दूसरी ओर, पाकिस्तान का कहना है कि उसकी नौसेना अभ्यास कर रही थी और भारतीय जहाज ने खतरनाक तथा आक्रामक तरीके से उसके पोत के पास संचालन किया।
PNS Hunain को नुकसान की जानकारी
रिपोर्टों के मुताबिक, टक्कर में पाकिस्तानी नौसैनिक पोत PNS Hunain को नुकसान पहुंचा और उसे वापस बंदरगाह लौटना पड़ा। भारतीय पक्ष से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारतीय युद्धपोत को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह अपना नियमित मिशन जारी रखने में सक्षम रहा। उपलब्ध रिपोर्टों में घटना में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं की गई है।
भारतीय पोत निगरानी मिशन पर था
भारतीय पक्ष के अनुसार, उसका युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी अभियान पर तैनात था। भारतीय अधिकारियों से जुड़ी रिपोर्टों में कहा गया कि PNS Hunain भारतीय पोत के पास तेज गति से पहुंचा और नजदीकी क्षेत्र में असुरक्षित तरीके से संचालन किया। हालांकि, पाकिस्तान ने इस घटनाक्रम का अलग विवरण पेश किया है।
1991 के समझौते का भी आया जिक्र
भारत ने इस घटना के संदर्भ में अप्रैल 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते का उल्लेख किया है। इस समझौते का उद्देश्य सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिक गतिविधियों की जानकारी साझा करके गलतफहमी से पैदा होने वाले संकट को रोकना था। इसके अनुच्छेद 10 में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच कम से कम तीन समुद्री मील की दूरी रखने का प्रावधान बताया गया है।
2011 की घटना की भी आई याद
भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों के बीच समुद्र में संपर्क की यह घटना पहली बार नहीं है। इससे पहले 2011 में अदन की खाड़ी में पाकिस्तानी नौसैनिक पोत PNS Babur और भारतीय युद्धपोत INS Godavari के बीच संपर्क हुआ था। उस घटना में भारतीय जहाज को मामूली नुकसान की जानकारी सामने आई थी।
भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने पर जोर
ताजा घटना के बाद दोनों देशों ने राजनयिक माध्यमों से अपना पक्ष दर्ज कराया है। भारत ने संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक अपनी आपत्ति पहुंचाने और सैन्य इकाइयों को सावधानी बरतने की जरूरत बताई है। वहीं पाकिस्तान ने भारतीय पोत की गतिविधियों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे में आगे की स्थिति दोनों देशों की आधिकारिक जांच और राजनयिक बातचीत पर निर्भर करेगी।
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