TMC Symbol Row : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनावों में मूल पार्टी नाम और ‘फूल एवं घास’ वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया गया। इसके बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने बीजेपी पर लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप
राहुल गांधी ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक के मुद्दे को विपक्षी दलों से जुड़े व्यापक राजनीतिक विवाद से जोड़ते हुए बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने अपने बयान में ‘वोट चोरी’, ‘सरकार चोरी’ और अब ‘पार्टी चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्रवाई विपक्षी दलों को कमजोर करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। ये राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर बीजेपी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है।
बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान पर किया पलटवार
राहुल गांधी के आरोपों के बाद बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को बीजेपी पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास को देखना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के पुराने दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने अलग-अलग समय पर समर्थन वापस लेने के फैसले किए थे, जिनके कारण एच. डी. देवगौड़ा, चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर और आई. के. गुजराल की सरकारें प्रभावित हुई थीं।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के इतिहास का किया जिक्र
बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि केंद्र की राजनीति में सरकारों का बनना और गिरना गठबंधन तथा समर्थन से जुड़ा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख किया। बीजेपी की ओर से यह प्रतिक्रिया TMC विवाद को लेकर राहुल गांधी के बयान के जवाब में सामने आई।
चुनाव आयोग ने दोनों TMC गुटों को नए नाम दिए
चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को दोनों प्रतिद्वंद्वी TMC गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया। वहीं अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
उपचुनावों को देखते हुए लिया गया अंतरिम फैसला
चुनाव आयोग का यह कदम पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनावों से पहले सामने आया है। आयोग ने पहले दोनों गुटों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल एवं घास’ चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों से वैकल्पिक नाम और स्वतंत्र चुनाव चिह्नों के विकल्प मांगे गए। बाद में आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग पहचान तय कर दी, जिससे उम्मीदवारों के चुनावी नामांकन और पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
नए नाम और प्रतीक फिलहाल उपचुनावों के लिए लागू
चुनाव आयोग के नए आवंटन को फिलहाल आगामी उपचुनावों के संदर्भ में देखा जा रहा है। आयोग की कार्रवाई का उद्देश्य दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग चुनावी पहचान उपलब्ध कराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के साथ अन्य संबंधित क्षेत्रों में भी दोनों गुटों की राजनीतिक पहचान को लेकर आयोग ने व्यवस्था स्पष्ट की है।
TMC विवाद ने बढ़ाई कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी
TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। राहुल गांधी ने आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ा, जबकि बीजेपी ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का हवाला देकर पलटवार किया। इस बीच, चुनाव आयोग के नए नाम और चिह्न आवंटित करने के फैसले के बाद दोनों गुट अब अलग-अलग चुनावी पहचान के साथ आगामी उपचुनावों में उतरने की स्थिति में हैं।
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