FSSAI Nestle Case : बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूला फूड को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने Nestlé India के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने कंपनी से जुड़े मामलों में तीन अलग-अलग एडजुडिकेशन केस दर्ज किए हैं। जांच के दौरान कंपनी के कुछ उत्पादों के प्रचार में कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन और एक फॉलो-अप फॉर्मूला में पोषण संबंधी मानकों से जुड़ी कमी सामने आने की बात कही गई है।
दो उत्पादों के प्रचार में मिले कथित नियम उल्लंघन
FSSAI के अनुसार, Nestlé India के दो उत्पादों के प्रचार की जांच में ऐसे दावे सामने आए, जिन्हें लागू नियमों के अनुरूप नहीं माना गया। इनमें NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 शामिल हैं। प्राधिकरण ने इन दोनों उत्पादों से संबंधित प्रचार सामग्री में किए गए दावों को लेकर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है।
NAN Excella Pro Stage 1 पर क्या है आरोप
जांच के दौरान NAN Excella Pro Stage 1 के प्रचार में ‘5 HMOs’ और ‘Whey Protein’ से जुड़े दावे पाए गए। FSSAI ने इन दावों को लेकर कंपनी से जवाब मांगा है। प्राधिकरण के मुताबिक, शिशु आहार से जुड़े उत्पादों के प्रचार में ऐसे दावों का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के दायरे में होना जरूरी है।
Lactogen Pro 1 के प्रचार पर भी सवाल
Lactogen Pro 1 के प्रचार में ‘Whey Protein being easy to digest’ यानी व्हे प्रोटीन आसानी से पचने का दावा किया गया था। FSSAI ने इस दावे को भी जांच के दायरे में लिया। प्राधिकरण के अनुसार, दोनों उत्पादों की प्रचार सामग्री को शिशु पोषण से जुड़े लागू प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाया गया।
फूड फॉर इन्फेंट न्यूट्रिशन रेगुलेशन का हवाला
FSSAI ने बताया कि दोनों उत्पादों के प्रचार से जुड़े मामलों में Food Safety and Standards (Food for Infant Nutrition) Regulations, 2020 के प्रावधानों का सवाल सामने आया है। विशेष रूप से रेगुलेशन 4(2) के तहत शिशु आहार की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से किए जाने वाले कुछ प्रचार और दावों पर प्रतिबंध लागू है। प्राधिकरण ने इसी आधार पर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है।
इन्फेंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स एक्ट के तहत भी प्रावधान
मामले में Infant Milk Substitutes Act, 1992 की धारा 3 का भी उल्लेख किया गया है। इस कानून के तहत शिशुओं के लिए दूध के विकल्प और संबंधित उत्पादों के विज्ञापन एवं प्रचार को लेकर विशेष प्रतिबंध और नियम निर्धारित हैं। FSSAI की कार्रवाई में इन कानूनी प्रावधानों को भी आधार बनाया गया है।
सिर्फ विज्ञापन नहीं, उत्पाद की गुणवत्ता भी जांची गई
FSSAI की कार्रवाई केवल प्रचार सामग्री तक सीमित नहीं रही। प्राधिकरण के अनुसार, Nestlé India द्वारा निर्मित एक फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने की प्रयोगशाला जांच भी की गई। शुरुआती जांच में इस उत्पाद में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद नमूने को दोबारा जांच के लिए रेफरल लैब भेजा गया।
दोबारा जांच में भी बायोटिन मानक का मुद्दा
FSSAI के मुताबिक, रेफरल लेबोरेटरी में किए गए परीक्षण में भी संबंधित नमूना निर्धारित बायोटिन मानक के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद उत्पाद की पोषण संबंधी गुणवत्ता को लेकर मामला सामने आया। शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले फॉर्मूला फूड में पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुसार रखना जरूरी होता है।
बायोटिन क्यों होता है महत्वपूर्ण पोषक तत्व
बायोटिन एक आवश्यक विटामिन है, जो शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। फॉर्मूला फूड जैसे शिशु पोषण उत्पादों में विभिन्न पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों के मुताबिक होना जरूरी है। इसलिए किसी उत्पाद में पोषण संबंधी मानक से जुड़ी कमी पाए जाने पर नियामक स्तर पर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
Nestlé India के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले
इन सभी मामलों के आधार पर FSSAI ने Nestlé India के खिलाफ तीन अलग-अलग एडजुडिकेशन केस दर्ज किए हैं। इनमें दो मामले उत्पादों के प्रचार और दावों से संबंधित हैं, जबकि तीसरा मामला फॉलो-अप फॉर्मूला के पोषण संबंधी मानक से जुड़ा बताया गया है। अब इन मामलों में कंपनी की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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