Nandigram Bypoll : पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को हल्दिया की अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अदालत के आदेश के मुताबिक उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में रहना होगा। यह कार्रवाई 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में लंबित गैर-जमानती वारंटों के आधार पर हुई है।
शुक्रवार को पुराने मामलों में गिरफ्तार हुए थे मिलन प्रधान
मिलन प्रधान को पुलिस ने शुक्रवार, 18 सितंबर को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक उनके खिलाफ 2007 में नंदीग्राम और खेजुरी थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों से संबंधित चार लंबित गैर-जमानती वारंट थे। इन मामलों में हत्या, दंगा, आपराधिक धमकी और अन्य गंभीर आरोप शामिल बताए गए हैं। शनिवार को उन्हें हल्दिया सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
चार गैर-जमानती वारंटों का है मामला
पुलिस का कहना है कि मिलन प्रधान के खिलाफ अदालतों से जारी चार गैर-जमानती वारंट काफी समय से लंबित थे। पुलिस के अनुसार, इन वारंटों की तामील कराने के पहले भी कई प्रयास किए गए थे, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। अधिकारियों ने संबंधित अदालतों को समय-समय पर Non-Execution Reports यानी NER भी भेजने की बात कही है। इन मामलों में उस समय लागू भारतीय दंड संहिता और Arms Act की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी।
चुनाव के दौरान वारंट की तामील पर पुलिस का पक्ष
पुलिस की ओर से कहा गया है कि चुनावी अवधि में लंबित गैर-जमानती वारंटों की तामील चुनाव प्रक्रिया से जुड़े निर्देशों के तहत की जा रही है। इसी कार्रवाई के दौरान मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने इसे लंबित मामलों में कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। वहीं, कांग्रेस और उसके समर्थक इस कार्रवाई के समय को लेकर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि गिरफ्तारी उपचुनाव से ठीक पहले हुई है।
ममता बनर्जी के समर्थन के बाद बदला चुनावी समीकरण
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी से पहले नंदीग्राम उपचुनाव में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम हुआ था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस धड़े की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नाम वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की थी। इस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद प्रधान की गिरफ्तारी सामने आई, जिससे चुनावी माहौल में चर्चा और तेज हो गई।
गिरफ्तारी के समय को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस की ओर से गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि उपचुनाव के दौरान उम्मीदवार की गिरफ्तारी से उसके चुनाव प्रचार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, पुलिस और अन्य पक्षों की ओर से इसे पुराने लंबित मामलों तथा अदालत के गैर-जमानती वारंटों की तामील से जुड़ी नियमित कानूनी कार्रवाई बताया गया है। ऐसे में इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बहस जारी है।
3 अक्टूबर तक हिरासत, प्रचार पर पड़ा असर
मिलन प्रधान को 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद उनके चुनाव प्रचार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होना है और चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त होगा। ऐसे में अदालत का मौजूदा आदेश उनके व्यक्तिगत प्रचार कार्यक्रम को प्रभावित करता है। हालांकि चुनाव अभियान को आगे किस तरह संचालित किया जाएगा, यह पार्टी और स्थानीय संगठन की रणनीति पर निर्भर करेगा।
नंदीग्राम उपचुनाव पर सबकी नजर
नंदीग्राम पहले से ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में शामिल रहा है। अब उपचुनाव से कुछ दिन पहले कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत ने चुनावी घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ पुराने आपराधिक मामलों में अदालत की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इस घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अगले कदम पर निगाह रहेगी।
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