Trump Greenland Deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मुख्य रूप से ग्रीनलैंड और व्यापक आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ा है। इसके तहत अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजना
समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और बुनियादी ढांचे को विस्तार देने की योजना सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, नार्सार्सुआक और मेस्टर्सविग में दो नए सैन्य स्थलों को विकसित करने की योजना है। इन स्थानों के विकास का उद्देश्य आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य पहुंच तथा सुरक्षा क्षमता को मजबूत करना बताया गया है।
डेनमार्क ने संप्रभुता और आत्मनिर्णय के अधिकार पर दिया जोर
डेनमार्क सरकार ने समझौते के संबंध में स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता और डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रहेगी। साथ ही ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को भी मान्यता दी गई है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने समझौते को आर्कटिक तथा उत्तरी अटलांटिक की साझा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
ग्रीनलैंड की संप्रभुता को लेकर पहले ट्रंप से हुआ था विवाद
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और डेनमार्क के बीच पहले भी तनाव सामने आ चुका है। ट्रंप कई मौकों पर ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए वहां अमेरिकी नियंत्रण की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। इसके जवाब में डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने क्षेत्र की संप्रभुता तथा स्थानीय लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया था।
नए समझौते के बावजूद ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा रहेगा
ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क साम्राज्य के भीतर एक स्वशासित क्षेत्र है। नए समझौते के बाद भी उसकी संवैधानिक स्थिति में बदलाव की बात नहीं कही गई है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने कहा कि समझौता डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता के साथ-साथ ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को स्वीकार करता है।
ग्रीनलैंड में अमेरिका की पहले से मौजूद है सैन्य उपस्थिति
अमेरिका की ग्रीनलैंड में पहले से सैन्य मौजूदगी है। पिटुफिक स्पेस बेस वहां अमेरिकी सैन्य और अंतरिक्ष गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। नए समझौते के जरिए अमेरिका की सैन्य पहुंच और बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की योजना है। हालांकि, समझौते के सभी विस्तृत प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, इसलिए इसकी पूरी कार्ययोजना स्पष्ट होना बाकी है।
आर्कटिक सुरक्षा में ग्रीनलैंड का स्थान क्यों महत्वपूर्ण है
ग्रीनलैंड का भौगोलिक स्थान इसे अमेरिका, यूरोप और आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण बनाता है। यह उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक के बीच रणनीतिक स्थिति में है। इसी वजह से क्षेत्र में सैन्य निगरानी, समुद्री मार्गों और सुरक्षा बुनियादी ढांचे को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की विशेष रुचि है।
रूस और चीन की गतिविधियों से जुड़ी अमेरिका की रणनीतिक चिंता
आर्कटिक क्षेत्र में रूस की सैन्य गतिविधियों और चीन की बढ़ती रणनीतिक एवं आर्थिक सक्रियता को लेकर अमेरिका की चिंताएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में ग्रीनलैंड में सैन्य क्षमता बढ़ाने को व्यापक आर्कटिक सुरक्षा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। नया समझौता उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक में सहयोग तथा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है।
समझौते से सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा, संप्रभुता का मुद्दा रहेगा कायम
नए त्रिपक्षीय समझौते में अमेरिकी सुरक्षा भूमिका के विस्तार और ग्रीनलैंड की संप्रभुता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है। अमेरिका को सैन्य बुनियादी ढांचे और पहुंच से जुड़ी अतिरिक्त भूमिका मिलने की बात है, जबकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने संप्रभुता तथा आत्मनिर्णय के अधिकार को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है। समझौते के विस्तृत प्रावधान सामने आने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन अधिक स्पष्ट हो सकेगा।
Read More : Cancer Medicine Price : कैंसर मरीजों से दवा के नाम पर कितनी वसूली, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से मचा हड़कंप