OIC on Kashmir : संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के जम्मू-कश्मीर मंत्री-स्तरीय संपर्क समूह की बैठक हुई। OIC ने बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन को दोहराया। संगठन के महासचिव इस्माइल ओल्ड शेख अहमद ने इसे दक्षिण एशिया में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताया।
OIC ने आत्मनिर्णय के अधिकार का किया समर्थन
OIC के आधिकारिक बयान के मुताबिक, संगठन ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया कि यह रुख संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप है। बैठक का आयोजन संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर किया गया था।
2019 के बाद उठाए गए कदमों पर OIC की आपत्ति
OIC महासचिव ने क्षेत्र की मानवीय स्थिति, मानवाधिकारों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। संगठन ने 2019 के बाद उठाए गए उन कदमों को वापस लेने की मांग दोहराई, जिन्हें वह एकतरफा और गैरकानूनी मानता है। OIC ने साथ ही जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय स्थिति के सम्मान की बात कही।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का दिया हवाला
बैठक के दौरान OIC ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के जम्मू-कश्मीर से संबंधित प्रस्तावों का भी उल्लेख किया। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से 1949 के बाद अपनाए गए संबंधित प्रस्तावों के लागू रहने की पुष्टि का स्वागत किया। OIC ने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी रखने की जरूरत है।
मानवाधिकार और घटनाओं के दस्तावेजीकरण पर जोर
OIC महासचिव ने क्षेत्र में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करने का आह्वान किया। संगठन ने घटनाओं का पारदर्शी तरीके से दस्तावेजीकरण करने और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर बनाए रखने की अपील भी की। ये बातें OIC के आधिकारिक बयान में कही गई हैं।
OIC बैठक में 2019 के फैसलों का मुद्दा उठा
बैठक में भारत सरकार की ओर से अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में किए गए बदलावों को लेकर भी OIC का रुख सामने आया। संगठन ने 2019 के बाद उठाए गए कदमों को वापस लेने की मांग दोहराई। हालांकि, OIC का यह रुख उसका आधिकारिक पक्ष है और भारत लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को अपना आंतरिक मामला बताता रहा है।
जम्मू-कश्मीर पर भारत का रुख क्या है
भारत ने अतीत में OIC की जम्मू-कश्मीर संबंधी टिप्पणियों को खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड में भारत ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और OIC को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। भारत ने OIC के ऐसे संदर्भों और प्रस्तावों को अस्वीकार करने की बात भी आधिकारिक रूप से कही है।
भारत OIC के बयानों पर पहले भी दे चुका है जवाब
विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत ने पहले भी OIC की जम्मू-कश्मीर संबंधी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। 2008 में भारत ने कहा था कि OIC को भारत के आंतरिक मामलों, जिसमें जम्मू-कश्मीर भी शामिल है, पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। इसी तरह 2011 में भी भारत ने OIC के संदर्भों को खारिज करते हुए जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया था।
OIC का संपर्क समूह लगातार उठाता रहा है कश्मीर मुद्दा
जम्मू-कश्मीर OIC के उन संपर्क समूहों में शामिल है, जिनकी बैठकें संगठन संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के दौरान करता है। OIC के अनुसार, 81वें UNGA सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर के अलावा फिलिस्तीन, रोहिंग्या और अफगानिस्तान जैसे मुद्दों पर भी अलग-अलग संपर्क समूहों की बैठकें आयोजित की गईं।
कश्मीर मुद्दे पर फिर सामने आए अलग-अलग पक्ष
न्यूयॉर्क की इस बैठक के बाद एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को लेकर OIC और भारत के अलग-अलग आधिकारिक रुख सामने आए हैं। OIC ने आत्मनिर्णय, मानवाधिकार और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर जोर दिया है, जबकि भारत लगातार जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा और इस विषय को अपने आंतरिक मामलों से जुड़ा मुद्दा बताता रहा है। ऐसे में UNGA के दौरान हुई यह बैठक कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर जारी अलग-अलग कूटनीतिक दृष्टिकोण को सामने लाती है।
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