TMC Symbol Row: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न ‘जोड़ा घास फूल’ को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग से इस मामले में अंतिम निर्णय लेने की संभावित समयसीमा बताने को कहा है। विवाद पार्टी के दो विरोधी गुटों के बीच नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर है। मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई को चुनौती दी है।
ममता बनर्जी की याचिका पर हुई सुनवाई
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में निर्वाचन आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी गई है। बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए, जबकि निर्वाचन आयोग का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने रखा।
निर्वाचन आयोग से समयसीमा की जानकारी मांगी
सुनवाई के दौरान पीठ ने निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू से पूछा कि TMC के नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद पर अंतिम निर्णय कब तक लिया जा सकता है। अदालत ने आयोग से इस संबंध में स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
छह अक्टूबर के उपचुनाव का भी आया जिक्र
सुनवाई के दौरान छह अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव का मुद्दा भी सामने आया। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इस पर ममता बनर्जी की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने कहा कि वह ईमानदारी से कहें तो चुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं कर सकते। उन्होंने अदालत के सामने आयोग की प्रक्रिया से जुड़े अपने पक्ष को रखा।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान कार्रवाई पर सिब्बल की आपत्ति
कपिल सिब्बल ने निर्वाचन आयोग की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्रवाई चुनाव प्रक्रिया के दौरान की गई। उनके अनुसार, इस स्थिति में ममता बनर्जी के पास आयोग के रोक संबंधी आदेश को चुनौती देने के लिए प्रभावी उपाय नहीं बचा। सिब्बल ने अदालत के समक्ष आयोग की कार्रवाई को प्रक्रिया की दृष्टि से अनुचित बताया।
CJI ने आयोग को सुनवाई तेज करने का सुझाव दिया
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि निर्वाचन आयोग को मामले की सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आयोग कुछ समय तक रोजाना सुनवाई कर सकता है, आवश्यक साक्ष्य और गवाही रिकॉर्ड कर सकता है तथा उसके बाद विवाद पर फैसला कर सकता है। अदालत का यह सुझाव मामले के जल्द निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
21 सितंबर को तत्काल सुनवाई पर सहमति
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर को ममता बनर्जी की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई थी। अब 28 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। अदालत का ध्यान फिलहाल निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और उसके अंतिम निर्णय की समयसीमा पर केंद्रित है।
आयोग ने दोनों गुटों को अलग नाम और चिन्ह दिए
निर्वाचन आयोग ने विवाद के बीच दोनों विरोधी गुटों को ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। इसके अलावा, विवाद पर अंतिम फैसला होने तक उनके चुनाव चिह्नों को ‘निलंबित’ रखने का निर्णय भी लिया गया है।
अंतिम फैसला आयोग की प्रक्रिया पर निर्भर
अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में निर्वाचन आयोग को विवाद के अंतिम निपटारे की समयसीमा और प्रक्रिया के संबंध में जानकारी देनी होगी। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की याचिका में आयोग की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। ऐसे में आगे की कानूनी प्रक्रिया में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आयोग इस विवाद पर अंतिम निर्णय किस समयसीमा में और किस प्रक्रिया के तहत लेता है।
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