CG Mid Day Meal Crisis : छत्तीसगढ़ में मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली रसोईया महिलाओं के सामने मानदेय भुगतान को लेकर परेशानी बढ़ती जा रही है। मध्यान्ह भोजन रसोईया संगठन की प्रदेश अध्यक्ष नीलू ओगरे के अनुसार, स्कूल खुलने के बाद 16 जून 2026 से लगातार काम करने के बावजूद रसोईया महिलाओं को अब तक करीब तीन महीने का मानदेय नहीं मिला है। संगठन ने जल्द भुगतान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
कम मानदेय के बीच आर्थिक संकट का दावा
रसोईया संगठन का कहना है कि महिलाएं स्कूलों में बच्चों के लिए नियमित रूप से मध्यान्ह भोजन तैयार करने का काम करती हैं। इसके बदले मिलने वाला मानदेय पहले से ही सीमित है। ऐसे में लगातार कई महीनों तक भुगतान लंबित रहने से उनके सामने आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं। संगठन की प्रदेश अध्यक्ष नीलू ओगरे ने समय पर भुगतान को रसोईया महिलाओं के लिए बेहद जरूरी बताया है।
11 सितंबर को राशि आवंटित होने का दावा
नीलू ओगरे के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 को डीपीई मंत्रालय की ओर से संबंधित राशि का आवंटन जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद 23 सितंबर तक रसोईया महिलाओं के बैंक खातों में मानदेय की राशि नहीं पहुंची थी। संगठन ने इस देरी पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब राशि का आवंटन हो चुका है, तो लाभार्थियों के खातों तक भुगतान पहुंचने में इतना समय क्यों लग रहा है।
समूह संचालकों के सामने भी भुगतान की समस्या
रसोईया महिलाओं के मानदेय के अलावा मध्यान्ह भोजन की सामग्री के लिए मिलने वाली राशि को लेकर भी परेशानी सामने आने की बात कही गई है। संगठन के अनुसार, कई समूह संचालकों के खातों में आवश्यक राशि नहीं पहुंची है। इसके कारण स्कूलों में भोजन तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री की व्यवस्था करने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सामग्री खरीदने को लेकर बढ़ी चिंता
समूह संचालकों का कहना है कि यदि खातों में राशि उपलब्ध नहीं होगी, तो लगातार मध्यान्ह भोजन के लिए जरूरी सामान की खरीद कैसे की जाएगी। संगठन ने कहा है कि भुगतान में देरी का असर केवल रसोईया महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर नहीं, बल्कि स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने पर भी पड़ सकता है। इसलिए लंबित राशि जल्द जारी करने की मांग की गई है।
28 सितंबर तक भुगतान की डेडलाइन
मानदेय और सामग्री की राशि को लेकर अब संगठन ने 28 सितंबर 2026 की समयसीमा तय की है। नीलू ओगरे के मुताबिक, यदि निर्धारित तारीख तक रसोईया महिलाओं और समूह संचालकों के खातों में राशि नहीं पहुंचती है, तो रसोईया महिलाएं हड़ताल पर जाने का फैसला कर सकती हैं। इससे सरकार और शिक्षा विभाग के सामने तत्काल भुगतान का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की तैयारी
संगठन की ओर से कहा गया है कि 28 सितंबर तक भुगतान होने पर विवाद को समाप्त किया जा सकता है, लेकिन यदि राशि खातों में नहीं पहुंची तो आंदोलन की स्थिति बन सकती है। रसोईया संगठन ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय से लंबित मानदेय को लेकर अब वे अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
रसोईया संगठन की प्रमुख मांगें
संगठन की मुख्य मांग है कि रसोईया महिलाओं का पिछले तीन महीने से लंबित मानदेय तत्काल जारी किया जाए। इसके साथ ही मध्यान्ह भोजन की सामग्री खरीदने के लिए समूह संचालकों के खातों में भी आवश्यक राशि जमा करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि इससे स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था प्रभावित होने से बचाई जा सकेगी।
एकजुट रहने की अपील
नीलू ओगरे ने रसोईया महिलाओं से अपनी मांगों को लेकर एकजुट रहने की अपील की है। उनका कहना है कि रसोईया महिलाएं लगातार बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रही हैं और उन्हें उनके काम का मानदेय समय पर मिलना चाहिए। अब सभी की नजर 28 सितंबर की समयसीमा पर है और देखना होगा कि उससे पहले लंबित भुगतान को लेकर क्या कदम उठाया जाता है।
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