Sweet Potato for Constipation: कब्ज से राहत के लिए ऐसे खाएं शकरकंद, जानें एक्सपर्ट की सलाह

कब्ज की समस्या में शकरकंद को डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद फाइबर मल को नरम करने और आंतों की गति बेहतर रखने में मदद कर सकता है। इसे उबालकर या भाप में पकाकर खाना बेहतर विकल्प माना जाता है। हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन से कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है, इसलिए संतुलित मात्रा जरूरी है।

Sweet Potato for Constipation : अगर आपको अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है या आप अपनी गट हेल्थ यानी आंतों को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो डाइट में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। शकरकंद भी ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ है, जिसमें फाइबर के साथ कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाने से पाचन प्रक्रिया को बेहतर रखने और मल त्याग को नियमित बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, शकरकंद को किस तरह पकाया और खाया जाता है, इसका भी असर हो सकता है

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गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया शकरकंद खाने का तरीका

फ्लोरिडा के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर डॉक्टर जोसेफ सलहाब ने शकरकंद तैयार करने का एक आसान तरीका साझा किया है। उनके मुताबिक, इसे पहले बेक करके और फिर कुछ समय के लिए ठंडा करने के बाद दोबारा गर्म करके खाने से इसमें मौजूद स्टार्च की प्रकृति में बदलाव आता है। यह बदलाव आंतों के लिए उपयोगी हो सकता है और गट हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है।

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शकरकंद में मौजूद फाइबर करता है पाचन में मदद

डॉक्टर जोसेफ सलहाब के अनुसार, शकरकंद में घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर पाए जाते हैं। घुलनशील फाइबर पानी को सोखने में मदद करता है, जबकि अघुलनशील फाइबर मल में मात्रा बढ़ाने और पाचन तंत्र में उसकी गति को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसी वजह से फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को कब्ज से बचाव वाली डाइट का हिस्सा माना जाता है।

मैनिटोल भी हो सकता है उपयोगी

शकरकंद में प्राकृतिक रूप से मैनिटोल नाम का शुगर अल्कोहल भी पाया जाता है। यह आंतों में पानी खींचने में मदद कर सकता है, जिससे मल नरम होने और मल त्याग आसान होने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। अधिक मात्रा में कुछ शुगर अल्कोहल लेने पर कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने जैसी परेशानी भी हो सकती है।

शकरकंद की आसान रेसिपी के लिए सामग्री

इस रेसिपी को तैयार करने के लिए आपको बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं है। इसके लिए एक मध्यम आकार की शकरकंद, थोड़ी मात्रा में ऑलिव ऑयल और स्वाद के अनुसार काली मिर्च ले सकते हैं। चाहें तो अपनी पसंद और डाइट के अनुसार मसालों की मात्रा को कम या ज्यादा किया जा सकता है। मुख्य बात यह है कि रेसिपी को बहुत अधिक तेल या भारी सामग्री के साथ तैयार न किया जाए।

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पहले शकरकंद को अच्छी तरह बेक करें

सबसे पहले शकरकंद को अच्छी तरह धोकर साफ करें और उसे बीच से दो हिस्सों में काट लें। इसके कटे हुए हिस्से पर थोड़ी मात्रा में ऑलिव ऑयल लगाएं और स्वाद के अनुसार काली मिर्च छिड़कें। इसके बाद शकरकंद के कटे हुए हिस्से को नीचे की तरफ रखते हुए पार्चमेंट पेपर पर रखें। इसे लगभग 45 मिनट तक या पूरी तरह नरम होने तक बेक किया जा सकता है।

बेक करने के बाद 24 घंटे फ्रिज में रखें

शकरकंद के अच्छी तरह पक जाने के बाद इसे तुरंत खाने के बजाय लगभग 24 घंटे के लिए फ्रिज में रखने की सलाह दी गई है। इसके बाद इसे बाहर निकालकर दोबारा गर्म करें और फिर खाएं। यह तरीका सामान्य तरीके से गर्म शकरकंद खाने से थोड़ा अलग है, लेकिन इसके पीछे स्टार्च में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण माना जाता है।

ठंडा करने से बन सकता है रेसिस्टेंट स्टार्च

डॉक्टर सलहाब के मुताबिक, जब पके हुए शकरकंद को ठंडा किया जाता है, तो उसमें मौजूद स्टार्च का कुछ हिस्सा रेसिस्टेंट स्टार्च में बदल सकता है। रेसिस्टेंट स्टार्च सामान्य स्टार्च की तरह पूरी तरह जल्दी पचने के बजाय आंतों के आगे के हिस्से तक पहुंच सकता है।

रेसिस्टेंट स्टार्च गट बैक्टीरिया के लिए बनता है भोजन

रेसिस्टेंट स्टार्च बड़ी आंत तक पहुंचने के बाद वहां मौजूद कुछ लाभकारी बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम कर सकता है। इस तरह यह आंतों के माइक्रोबायोम को सपोर्ट करने में भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा, फाइबर और रेसिस्टेंट स्टार्च मल की मात्रा और नियमितता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

कब्ज में डाइट के साथ रखें इन बातों का ध्यान

शकरकंद को डाइट में शामिल करना कब्ज से निपटने की रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहना उचित नहीं है। पर्याप्त पानी पीना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और पूरी डाइट में पर्याप्त फाइबर लेना भी जरूरी है। अगर कब्ज लंबे समय तक बना रहता है, बहुत ज्यादा दर्द होता है, खून आता है या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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Chandan Das

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