CG Land Scam : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में जमीन से जुड़े एक चर्चित मामले में कलेक्टर और न्यायपालिका के बीच पत्राचार को लेकर हलचल तेज हो गई है। कलेक्टर अजीत बसंत ने आरोपी आजाद इराकी को जमानत दिए जाने के बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखा है। पत्र में जमानत की प्रक्रिया और अभियोजन पक्ष को सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से जुड़े कई बिंदु उठाए गए हैं।
अभियोजन को सुने बिना जमानत देने का आरोप
कलेक्टर के पत्र में कहा गया है कि थाना मणिपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 168/2026 में आरोपी आजाद इराकी ने 25 सितंबर 2026 को जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था। पत्र के मुताबिक, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने उसी दिन जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया। जिला अभियोजन निदेशालय की ओर से कलेक्टर को दिए गए प्रतिवेदन में दावा किया गया कि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था।

आदिवासी जमीन से जुड़ा है पूरा विवाद
मामला अंबिकापुर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के समीप रिंग बांध तालाब क्षेत्र की जमीन से जुड़ा बताया गया है। प्रशासन के अनुसार संबंधित खसरा नंबर 3714 की करीब 0.231 हेक्टेयर भूमि पुराने रिकॉर्ड में आदिवासी वर्ग के व्यक्ति के नाम दर्ज थी। आरोप है कि दस्तावेजों में कथित कूटरचना कर जमीन का नामांतरण गैर-आदिवासी व्यक्ति के नाम कराया गया और बाद में जमीन का लेनदेन किया गया।
कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला
इस प्रकरण में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। कलेक्टर के पत्र में धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) का उल्लेख किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मामला गंभीर प्रकृति का है और जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर थी। इसी आधार पर जमानत दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
एसटी वर्ग की जमीन होने का भी उल्लेख
कलेक्टर के पत्र के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि खसरा नंबर 3714 की जमीन पुराने अधिकार अभिलेखों में आदिवासी व्यक्ति के नाम थी। प्रशासन ने दावा किया कि दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर इसे गैर-आदिवासी के नाम किए जाने की बात सामने आई है। पत्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संभावित धारा का भी उल्लेख किया गया है।


अभियोजन ने अपील की जरूरत बताई
कलेक्टर के पत्र में कहा गया है कि यदि अभियोजन पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला, तो मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत के सामने प्रस्तुत नहीं किया जा सका। पत्र में न्यायहित में जमानत आदेश के खिलाफ अपील या पुनरीक्षण की आवश्यकता जताई गई है। प्रशासन ने विशेष न्यायालय के क्षेत्राधिकार से जुड़े पहलू का भी उल्लेख किया है।
आजाद इराकी की गिरफ्तारी और पिछला घटनाक्रम
रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी आजाद इराकी को सरगुजा पुलिस ने रायपुर से गिरफ्तार किया था। इससे पहले इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में उसकी अग्रिम जमानत याचिका जिला न्यायालय में खारिज हुई थी, जबकि बाद में हाईकोर्ट ने 13 मई 2026 को अग्रिम जमानत प्रदान की थी। जांच के दौरान जमीन के नामांतरण को लेकर राजस्व स्तर पर भी कार्रवाई हुई।
तालाब की जमीन और शासकीय कार्य में बाधा का मामला
प्रशासन के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में जलस्रोत की जमीन और आदिवासी भूमि के कथित हस्तांतरण का मामला सामने आया। नगर निगम की कार्रवाई के दौरान आरोपी पर अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार तथा धमकी देने का भी आरोप लगा था। इसके बाद उसके खिलाफ अलग से आपराधिक कार्रवाई की गई।
कलेक्टर के पत्र ने खड़े किए क्षेत्राधिकार से जुड़े सवाल
पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि जमानत आदेश के बाद कलेक्टर द्वारा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में एक सेवानिवृत्त मुख्य सचिव के हवाले से कहा गया है कि न्यायिक आदेश के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया जाना चाहिए। फिलहाल मामले में प्रशासन द्वारा उठाए गए बिंदुओं और आगे होने वाली न्यायिक कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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