Land For Jobs Case : रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने से जुड़े कथित धनशोधन मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार से जुड़े आरोपों पर अब अदालत में नए सिरे से दलीलें सुनी जाएंगी। दिल्ली की विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर अपनी दलीलें दोबारा रखने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
14 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई। ईडी के वकील ने आरोप तय किए जाने के बिंदु पर नए सिरे से दलीलें रखने के लिए समय मांगा। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 14 अक्टूबर तय कर दी।
पहले सुरक्षित रखा जा चुका था आदेश
इस मामले में इससे पहले विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने आरोप तय करने से संबंधित पक्षों की दलीलें सुन चुके थे। ईडी की ओर से इस मुद्दे पर दलीलें इसी साल 16 मार्च को पूरी कर ली गई थीं। इसके बाद अदालत ने आरोप तय करने के संबंध में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, बाद में न्यायाधीश विशाल गोगने का तबादला हो गया, जिसके कारण मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव हुआ।
विशेष जज विशाल गोगने का हुआ तबादला
बुधवार को अदालत के कर्मचारियों की ओर से भी न्यायाधीश विशाल गोगने के तबादले की जानकारी दी गई। दिल्ली हाई कोर्ट की ऑनलाइन सूचना प्रणाली के अनुसार, न्यायाधीश गोगने 22 सितंबर से रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में अब मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार की अदालत में आगे बढ़ रही है।
सीबीआई की शिकायत पर आधारित है मनी लॉन्ड्रिंग केस
यह धनशोधन का मामला धनशोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA, 2002 के तहत दर्ज किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दर्ज की गई शिकायत से जुड़े मामले पर आधारित है। आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे में कथित तौर पर नौकरी देने के बदले जमीन से संबंधित लेनदेन हुआ था। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की है।
सीबीआई मामले में 41 आरोपियों पर आरोप तय
इसी मामले से जुड़े सीबीआई केस में विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 9 जनवरी को लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार तथा धोखाधड़ी से जुड़े आरोप तय करने का आदेश दिया था। उस मामले में कुल 41 आरोपियों का उल्लेख किया गया था। अब इससे जुड़े धनशोधन मामले में आरोप तय किए जाने के मुद्दे पर अदालत में आगे की दलीलें सुनी जानी हैं।
ईडी की पहली चार्जशीट में कई नाम
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी पहली चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनकी बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया था। इसके अलावा यादव परिवार के कथित करीबी सहयोगी अमित कात्याल, पूर्व रेलवे कर्मचारी हृदयानंद चौधरी और दो कंपनियों—AK Infosystems Pvt Ltd तथा AB Exports Pvt Ltd—को भी आरोपी के तौर पर शामिल किया गया है।
रेल मंत्री रहने के समय से जुड़ा मामला
यह मामला उस अवधि से संबंधित है जब लालू प्रसाद यादव यूपीए-1 सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसी अवधि के दौरान रेलवे में कथित नौकरी के बदले जमीन से जुड़े लेनदेन की जांच की गई। दोनों कंपनियों के कॉमन डायरेक्टर के तौर पर शरीकुल बारी का नाम भी ईडी की चार्जशीट में सामने आया है। अब अदालत में 14 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में आरोप तय करने के मुद्दे पर आगे की दलीलें रखी जाएंगी।
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