Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। साल 2026 की शारदीय नवरात्रि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास बताई जा रही है। पंचांग के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगी और 19 अक्टूबर को महानवमी के साथ इसका समापन होगा। इस दौरान कई शुभ ग्रह योग और नक्षत्रीय संयोग बनने की बात कही जा रही है।
घटस्थापना के दिन बनेगा गजकेसरी योग
नवरात्रि की प्रतिपदा यानी घटस्थापना के दिन सूर्योदय के समय हस्त नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग रहेगा। इसी समय गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण गजकेसरी योग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु और चंद्रमा से बनने वाले इस योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गजकेसरी योग ज्ञान, समृद्धि, प्रतिष्ठा और बेहतर निर्णय क्षमता से जुड़ा होता है।
58 साल बाद ऐसा संयोग बनने का दावा
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार नवरात्रि की शुरुआत में वार, नक्षत्र और योग का जो विशेष मेल बन रहा है, वह करीब 58 साल बाद देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि 2026 की शारदीय नवरात्रि को ग्रह-नक्षत्रों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे शुभ संयोग में देवी उपासना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है।
30 साल बाद शश राजयोग की स्थिति
इस बार नवरात्रि के दौरान केवल गजकेसरी योग ही चर्चा में नहीं है, बल्कि शनि की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में स्थित हैं। शनि की इस विशेष स्थिति को पंच महापुरुष योगों में शामिल शश राजयोग से जोड़ा जाता है। ज्योतिष में शश राजयोग को अनुशासन, मेहनत, स्थिरता, न्याय और जिम्मेदारी से संबंधित माना जाता है।
मेहनत और अनुशासन से जुड़े कार्यों के लिए खास समय
ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, करीब 30 साल बाद नवरात्रि के दौरान शनि की ऐसी स्थिति बन रही है। शश राजयोग के प्रभाव को लेकर माना जाता है कि इस दौरान धैर्य और निरंतर प्रयास से किए गए कार्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आध्यात्मिक साधना, अनुशासन और जिम्मेदारी से जुड़े कार्यों के लिए भी इस अवधि को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
गुरु और सूर्य का शुभ संबंध भी बनेगा
नवरात्रि के दौरान देवगुरु बृहस्पति और सूर्य के बीच भी शुभ भावों में परस्पर दृष्टि संबंध बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, शिक्षा और विस्तार का कारक माना जाता है। वहीं सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, सम्मान और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। दोनों ग्रहों का शुभ संबंध धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
सर्वार्थ सिद्धि योग बढ़ाएगा नवरात्रि का महत्व
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में कई अन्य शुभ योग भी बनने की बात कही गई है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, करीब चार से पांच दिनों तक सर्वार्थ सिद्धि योग का प्रभाव रहेगा। इस योग को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में शुरू किए गए कार्यों में सफलता की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।
दो दिन बनेगा अमृत सिद्धि योग
नवरात्रि के दौरान करीब दो दिन अमृत सिद्धि योग बनने की भी बात कही जा रही है। ज्योतिष में इस योग को भी शुभ और विशेष फलदायी माना जाता है। ऐसे में 2026 की शारदीय नवरात्रि धार्मिक आस्था के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इन योगों के प्रभाव से जुड़ी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
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