Delhi Police FIR : दिल्ली के जंतर-मंतर पर 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पांच प्रमुख पत्रकार संगठनों ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संगठनों ने आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
पांच बड़े पत्रकार संगठनों ने पुलिस आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
इंडियन वुमन्स प्रेस कॉर्प्स (IWPC), प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI), दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ), प्रेस एसोसिएशन और केरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने बुधवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को संयुक्त ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने कहा कि तीन महिला पत्रकारों की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के बावजूद ACP विवेक भगत के खिलाफ अभी तक FIR दर्ज नहीं की गई है।
संज्ञेय अपराध पर FIR दर्ज करने की मांग
पत्रकार संगठनों ने ज्ञापन में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी शिकायत से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। संगठनों ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने के साथ मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की, ताकि शिकायतकर्ताओं को निष्पक्ष जांच का भरोसा मिल सके।
महिला पत्रकार ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन की कवरेज कर रही एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि हिरासत में ली जा रही महिला प्रदर्शनकारी का वीडियो रिकॉर्ड करने के दौरान उनके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और धक्का-मुक्की की गई। दो अन्य महिला पत्रकारों ने भी अधिकारी पर अनुचित तरीके से छूने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच को सौंपी जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच नई दिल्ली जिले से क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी है। पुलिस के मुताबिक, जांच को निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और घटना से जुड़े CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है।
पत्रकार संगठनों ने पुलिस के रवैये पर जताई नाराजगी
पांचों संगठनों ने पत्रकारों के प्रति पुलिस के कथित कठोर रवैये और बर्ताव की निंदा की है। उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। खासतौर पर महिला पत्रकारों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।
डिजिटल और स्वतंत्र पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा
ज्ञापन में डिजिटल और स्वतंत्र मीडिया से जुड़े पत्रकारों की सुरक्षा पर भी विशेष चिंता जताई गई। संगठनों ने कहा कि YouTube, Instagram, Facebook और X जैसे प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों को केवल इसलिए रिपोर्टिंग के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके पास औपचारिक सरकारी मान्यता नहीं है।
पत्रकारों को सुरक्षित माहौल देने की मांग
पत्रकार संगठनों ने कहा कि मीडिया कर्मियों को अपना काम बिना डर, दबाव या किसी तरह के हस्तक्षेप के करने का अधिकार होना चाहिए। विशेष रूप से प्रदर्शन और संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग के दौरान पुलिस तथा पत्रकारों के बीच पेशेवर व्यवहार बनाए रखना जरूरी है। संगठनों ने इस मामले में पुलिस की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी जताई चिंता
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि पत्रकारों को स्वतंत्र और सुरक्षित माहौल में काम करने का अवसर मिलना चाहिए। संगठनों का कहना है कि मामले की निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक जांच जरूरी है। अब सबकी नजर दिल्ली पुलिस की आगामी कार्रवाई और जांच की दिशा पर है।
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