Surajpur Double Murder Case : सूरजपुर के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को फांसी और एक दोषी को मृत्यु पर्यंत कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश आनंद प्रकाश वरियाल की अदालत ने प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और नाबालिग पुत्री की हत्या के मामले में कुलदीप साहू, चंद्रकांत उर्फ सीके चौधरी और रिंकू सिंह को मृत्युदंड दिया। वहीं आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा को मृत्यु पर्यंत कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत के इस फैसले को सूरजपुर न्यायालय के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
13 अक्टूबर 2024 की रात हुई थी वारदात
पुलिस और अभियोजन के मुताबिक 13 अक्टूबर 2024 की रात आदतन अपराधी कुलदीप साहू ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया था। कुलदीप का प्रधान आरक्षक तालिब शेख से पुराना विवाद बताया गया था। घटना की रात उसने पहले शहर में पुलिसकर्मियों के साथ विवाद किया और एक पुलिसकर्मी पर कथित तौर पर खौलता हुआ तेल उड़ेल दिया। उसे पकड़ने पहुंचे पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने का प्रयास किए जाने का भी आरोप था।
घर में घुसकर पत्नी-बेटी की हत्या
इसके बाद कुलदीप साहू अपने तीन साथियों के साथ प्रधान आरक्षक तालिब शेख के किराए के मकान में पहुंचा। उस समय प्रधान आरक्षक घर पर मौजूद नहीं थे। अभियोजन के अनुसार आरोपितों ने घर में घुसकर उनकी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद चाकू व कैंची से हमला कर मां-बेटी की हत्या कर दी।
पोस्टमार्टम में सामने आई क्रूरता
मामले की जांच के दौरान सामने आए पोस्टमार्टम निष्कर्षों के अनुसार प्रधान आरक्षक की पत्नी के शरीर पर धारदार हथियार से 37 वार किए जाने के निशान मिले थे। वहीं नाबालिग बेटी के शरीर पर 20 वार के निशान पाए गए। हत्या के बाद दोनों के शवों को घटनास्थल से दूर पीढ़ा गांव में फेंक दिया गया था।
घटना के बाद सूरजपुर में भड़का था आक्रोश
दोहरे हत्याकांड की खबर सामने आने के बाद पूरे सूरजपुर में आक्रोश फैल गया था। लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से आरोपितों को गिरफ्तार किया और उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा। घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी हटा दिया गया था।
कुलदीप पर पहले से दर्ज थे कई मामले
अभियोजन के अनुसार मुख्य दोषी कुलदीप साहू आदतन अपराधी था और उसके खिलाफ इस घटना से पहले भी दो दर्जन से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज थे। इसी मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने के प्रयास के प्रकरण में अदालत ने 28 सितंबर 2026 को कुलदीप साहू को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
सजा के बाद हंसने का वीडियो हुआ था वायरल
10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद अदालत से बाहर निकलते समय कुलदीप साहू के हंसने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इस वीडियो को लेकर भी उस समय काफी चर्चा हुई थी।
अभियोजन ने बताया था ‘विरल से विरलतम’ मामला
दोहरे हत्याकांड में अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष इसे विरल से विरलतम श्रेणी का मामला बताते हुए दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। अदालत ने माना कि अपराध अत्यंत क्रूरता और सुनियोजित तरीके से किया गया था। इसी आधार पर अदालत ने कुलदीप साहू, चंद्रकांत उर्फ सीके चौधरी और रिंकू सिंह को फांसी की सजा सुनाई, जबकि आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा को आजीवन सजा सुनाई गई है।
सूरजपुर न्यायालय में पहली बार फांसी की सजा
इस फैसले की सबसे अहम बात यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद सूरजपुर न्यायालय द्वारा किसी मामले में पहली बार मृत्युदंड सुनाया गया है। वहीं सरगुजा संभाग के स्तर पर भी एक ही अपराध में तीन दोषियों को एक साथ फांसी की सजा सुनाए जाने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर में सूरजपुर क्षेत्र में हत्या के एक मामले में मृत्युदंड सुनाए जाने का उल्लेख मिलता है।
दो आरोपित पहले ही हो चुके हैं दोषमुक्त
इसी प्रकरण में दो अन्य आरोपितों को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में पहले ही दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद चार दोषियों के खिलाफ सुनवाई पूरी हुई और अदालत ने आठ अक्टूबर को फैसला सुनाने की तारीख निर्धारित की थी। गुरुवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को मृत्यु पर्यंत कारावास की सजा सुनाई।
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