Pakistan Air Force Yemen : सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए कथित त्रिपक्षीय सैन्य समझौते को लेकर क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब द्वारा मक्का समझौते को लागू करने के बाद पाकिस्तान वायु सेना के लड़ाकू विमान यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में शामिल हुए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है।
पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी के दावे से बढ़ा विवाद
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई में पाकिस्तानी वायु सेना के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। रिपोर्ट में इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक रूप से उपलब्ध गोपनीय सैन्य दस्तावेज पेश नहीं किया गया है, इसलिए इस जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सऊदी अरब में हजारों पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती का दावा
रिपोर्ट में पाकिस्तान में अमेरिकी सेना के पूर्व अटैची और डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व वरिष्ठ विश्लेषक कर्नल डेविड ओ. स्मिथ का भी हवाला दिया गया है। उनके अनुसार, विश्लेषकों के बीच यह आम धारणा है कि लगभग 8,000 पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब भेजे गए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास इस तैनाती से संबंधित गोपनीय आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर हो सकता है जोर
कर्नल स्मिथ के मुताबिक, सऊदी अरब में तैनात पाकिस्तानी सैनिकों में वायु सेना और सेना की वायु रक्षा इकाइयां भी शामिल हो सकती हैं। इनका संभावित उद्देश्य तेल प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में मदद करना हो सकता है। उन्होंने यह भी आकलन दिया कि पाकिस्तान के सैनिकों के हूतियों के खिलाफ सीधे जमीनी संघर्ष में उतरने की संभावना कम है, क्योंकि इस्लामाबाद ईरान के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखना चाहता है।
पाकिस्तान ने रिपोर्ट को बताया फर्जी और मनगढ़ंत
न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अन्य पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से कहा कि इस संघर्ष में पाकिस्तान की भूमिका सीधे जमीनी हमले के बजाय हूतियों के ड्रोन और मिसाइल खतरों को रोकने के लिए हवाई सहायता देने तक सीमित रह सकती है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने रिपोर्ट को फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से इनकार किया कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई में पाकिस्तानी वायु सेना के विमानों का इस्तेमाल किया गया है। इस विरोधाभास के कारण पाकिस्तान की वास्तविक सैन्य भूमिका पर सवाल बने हुए हैं।
क्या है सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की का मक्का समझौता?
रिपोर्ट के अनुसार, मक्का समझौते पर अगस्त में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे। पांच अक्टूबर को अल जजीरा और खाड़ी क्षेत्र के कुछ मीडिया संस्थानों ने खबर दी कि तीनों देश आपसी रक्षा व्यवस्था के तहत प्रतिरोधक कदम लागू करने और सऊदी अरब में तेजी से सैन्य बल तैनात करने पर सहमत हुए हैं।
यमन संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा पर नजर
यमन में हूती विद्रोही लंबे समय से सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और सऊदी अरब को भी निशाना बनाते रहे हैं। ऐसे में सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था में पाकिस्तान और तुर्की की संभावित भूमिका क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल, पाकिस्तानी विमानों की कथित भागीदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सैन्य कार्रवाई से जुड़े दावों और पाकिस्तान सरकार के खंडन को अलग-अलग समझना जरूरी है।
Read More : IMD Weather Alert : मौसम का अचानक बदलेगा मिजाज! दिल्ली यूपी समेत 15 राज्यों में बारिश का अलर्ट