SKRAU Bajra Varieties : राजस्थान के बीकानेर और आसपास के शुष्क क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए पानी की कमी एक बड़ी चुनौती है। कम बारिश और सीमित सिंचाई के कारण फसलों की पैदावार प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में कम पानी वाले इलाकों के अनुकूल फसलों और उन्नत बीजों की जरूरत बढ़ जाती है। इसी दिशा में बीकानेर स्थित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) में बाजरे की दो संकर किस्में विकसित की गई हैं। इनके नाम BHP 1202 और BHP 1602 हैं। इन किस्मों को लेकर शुष्क क्षेत्रों में बाजरे की खेती की संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
BHP 1202 और BHP 1602 का क्या है उद्देश्य?
बाजरा राजस्थान की प्रमुख फसलों में शामिल है और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी इसकी खेती की जाती है। BHP 1202 और BHP 1602 जैसी संकर किस्मों को विकसित करने का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में बाजरे की खेती को बढ़ावा देना है, जहां पानी की उपलब्धता सीमित रहती है। हालांकि, किसानों को इन किस्मों के बीज खरीदने से पहले उनकी उपलब्धता, आधिकारिक सिफारिश और अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्तता की जानकारी लेनी चाहिए। किसी किस्म का विकसित होना और उसका बाजार में बीज के रूप में उपलब्ध होना अलग-अलग बातें हैं।
कम अवधि में पकने वाली बाजरा किस्में क्यों जरूरी?
बाजरे की फसल को पकने में लगने वाला समय किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। कुछ किस्मों को तैयार होने में लगभग 80 से 90 दिन या उससे अधिक समय लग सकता है। यदि फसल के दौरान बारिश रुक जाए, तो मिट्टी में नमी कम होने से उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों पर अनुसंधान किया जा रहा है। लगभग 70 से 75 दिन में पकने वाली किस्में कुछ परिस्थितियों में किसानों के लिए उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, जल्दी पकने से अधिक पैदावार की गारंटी नहीं मिलती। उत्पादन मौसम, मिट्टी, बीज और कृषि प्रबंधन पर निर्भर करता है।
RHB 233 और RHB 234 भी किसानों के विकल्प
बाजरे की उन्नत किस्मों में RHB 233 और RHB 234 का नाम भी शामिल है। इनका संबंध राजस्थान के श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर से जुड़े कृषि अनुसंधान कार्यों से बताया गया है। इन किस्मों की विशेषताओं में आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों की अच्छी मात्रा का उल्लेख किया जाता है। उपलब्ध कृषि अनुसंधान रिकॉर्ड के अनुसार, RHB 233 की पकने की अवधि लगभग 80 दिन है और इसकी अनुकूलता राजस्थान सहित कई राज्यों के लिए बताई गई है। बुवाई से पहले किसानों को नवीनतम आधिकारिक सिफारिशों की पुष्टि करनी चाहिए।
खेत और पानी के हिसाब से चुनें बाजरे का बीज
किसानों को बीज खरीदते समय केवल अधिक उत्पादन के दावों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। जिन खेतों में सिंचाई की सुविधा है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अनुशंसित संकर किस्मों पर विचार किया जा सकता है। वहीं, कम बारिश वाले इलाकों में ऐसी किस्म का चयन करना उपयोगी हो सकता है, जो स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुकूल हो।
कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना क्यों जरूरी?
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिकारी डॉ. एन.के. शर्मा ने भी खेत और पानी की उपलब्धता के अनुसार किस्म चुनने की सलाह दी है। किसान बीज खरीदने से पहले नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क करें। इससे सही किस्म चुनने, खेती के जोखिम को कम करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
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