Durga Visarjan Rules: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और शक्ति उपासना का विशेष अवसर माना जाता है। नौ दिनों तक माता रानी की पूजा-अर्चना करने के बाद भक्त दुर्गा विसर्जन की तैयारी करते हैं। इस वर्ष दिए गए विवरण के अनुसार, दुर्गा विसर्जन 20 अक्टूबर को किया जाएगा। इसके लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक बताया गया है। विसर्जन से पहले मां दुर्गा को श्रद्धापूर्वक विदाई देना और घर में स्थापित पूजा सामग्री का सम्मानपूर्वक उपयोग करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
विसर्जन से पहले मां जया-विजया और अपराजिता की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा विसर्जन के दिन मां जया और विजया के साथ शमी तथा अपराजिता की पूजा करने की परंपरा भी है। भक्त माता रानी से विजय, सुख-समृद्धि और जीवन में आने वाली बाधाओं पर सफलता पाने की प्रार्थना करते हैं। विसर्जन से पहले रोली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई और वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की खुशहाली की कामना करें।
कलश के ऊपर रखे नारियल का क्या करें?
नवरात्रि के दौरान स्थापित कलश के ऊपर रखा नारियल धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार, विसर्जन के बाद इस नारियल को घर की किसी विवाहित महिला को दिया जा सकता है। दूसरा विकल्प यह है कि नारियल को स्वच्छ लाल कपड़े में बांधकर घर के पूजा स्थल पर रख दिया जाए। कई परिवार इस परंपरा को माता रानी के आशीर्वाद और घर की सुख-शांति से जोड़कर देखते हैं।
कलश में रखे सिक्के का कैसे करें उपयोग?
नवरात्रि पूजा के दौरान कलश में सिक्का रखने की परंपरा भी कई घरों में निभाई जाती है। विसर्जन के बाद इस सिक्के को निकालकर साफ लाल कपड़े में बांधकर घर या दुकान की तिजोरी में रखने की मान्यता है। श्रद्धालु इसे धन-समृद्धि और बरकत का प्रतीक मानते हैं। हालांकि, ये धार्मिक परंपराएं और आस्थाएं हैं; इनके परिणामों की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।
कलश के जल और अक्षत का क्या करें?
कलश विसर्जन के बाद उसमें रखे जल को श्रद्धापूर्वक उपयोग करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, आम के पत्तों की सहायता से इस जल का घर में छिड़काव किया जा सकता है। बचा हुआ जल किसी पौधे या गमले में डालना बेहतर विकल्प है। कुछ परिवार इस जल को अपने सदस्यों पर भी छिड़कते हैं। पूजा में इस्तेमाल किए गए अक्षत को स्वच्छ लाल कपड़े में बांधकर मुख्य द्वार के पास रखने की परंपरा भी प्रचलित है।
ज्वारे और दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन कैसे करें?
नवरात्रि में बोए गए ज्वारे को श्रद्धालु मां दुर्गा का आशीर्वाद मानते हैं। परंपरा के अनुसार, इन्हें कान पर रखकर शुभकामनाएं ली जाती हैं और बाद में विधिपूर्वक विसर्जित किया जाता है। दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के अनुसार निर्धारित स्थान पर करें। प्राकृतिक जलस्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए कृत्रिम या पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन कुंड का उपयोग करना बेहतर है। पूजा सामग्री को नदी या तालाब में प्लास्टिक सहित न डालें।
विसर्जन के बाद इन बातों का रखें ध्यान
दुर्गा विसर्जन के बाद नारियल, सिक्के, कलश का जल, अक्षत और ज्वारे का उपयोग परिवार की परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक संभालें और स्वच्छता का ध्यान रखें। श्रद्धा, संयम और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ मां दुर्गा को विदाई देना इस पर्व की भावना को और भी सार्थक बनाता है।
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