डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब का सेवन लिवर और ब्लड शुगर दोनों को प्रभावित कर सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शराब पीने के कई घंटे बाद भी शुगर खतरनाक स्तर तक गिर सकती है। जानिए इसके पीछे की वजह, कैंसर का जोखिम और डॉक्टरों की जरूरी सलाह।
डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब का सेवन लिवर और ब्लड शुगर दोनों को प्रभावित कर सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शराब पीने के कई घंटे बाद भी शुगर खतरनाक स्तर तक गिर सकती है। जानिए इसके पीछे की वजह, कैंसर का जोखिम और डॉक्टरों की जरूरी सलाह।

Alcohol and Diabetes : शराब का सेवन शरीर के कई अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। खासतौर पर लिवर, पैंक्रियाज और मेटाबॉलिज्म पर इसका असर पड़ सकता है। लंबे समय तक शराब पीने से फैटी लिवर और लिवर की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए जोखिम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि शराब ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डायबिटीज के मरीजों को शराब पीनी चाहिए और क्या इसकी कोई सुरक्षित मात्रा निर्धारित है?

लिवर विशेषज्ञ डॉ. शिव कुमार सरीन ने अपनी पुस्तक Own Your Body में शराब और लिवर की सेहत से जुड़े जोखिमों का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, शराब का सेवन लिवर की बीमारियों और कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम से जुड़ा है। हालांकि, कैंसर का खतरा केवल शराब पर निर्भर नहीं करता। हेपेटाइटिस बी और सी जैसे संक्रमण भी लिवर कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसलिए लिवर की सेहत को समझते समय शराब के सेवन के साथ दूसरे जोखिमों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

शराब शरीर में पहुंचने के बाद टूटकर एसीटैल्डिहाइड जैसे पदार्थ बनाती है। यह एक हानिकारक यौगिक है, जो कोशिकाओं और डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है। शराब का सेवन लिवर कैंसर के अलावा मुंह, भोजन नली, स्तन और कुछ अन्य अंगों के कैंसर के जोखिम से भी जुड़ा है। लंबे समय तक अधिक शराब पीने से लिवर में फैट जमा होने, सूजन और फाइब्रोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में लिवर सिरोसिस भी विकसित हो सकता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए शराब का एक बड़ा जोखिम ब्लड शुगर का असामान्य रूप से कम होना है। लिवर सामान्य परिस्थितियों में जरूरत पड़ने पर रक्त में ग्लूकोज छोड़ता है, लेकिन शराब इसके कामकाज को प्रभावित कर सकती है। खासकर इंसुलिन या कुछ ऐसी दवाएं लेने वाले लोगों में हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ सकता है। यह स्थिति शराब पीने के कई घंटे बाद भी हो सकती है। इसके लक्षणों में पसीना आना, कंपकंपी, चक्कर, भ्रम और गंभीर मामलों में बेहोशी शामिल हो सकते हैं।
शराब की ऐसी कोई मात्रा नहीं है जिसे सभी लोगों के लिए पूरी तरह जोखिम-मुक्त कहा जा सके। कैंसर और अन्य स्वास्थ्य जोखिम मात्रा तथा सेवन की अवधि के साथ बढ़ सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए जोखिम उनकी दवाओं, ब्लड शुगर नियंत्रण और लिवर की स्थिति पर भी निर्भर करता है। इसलिए शराब से परहेज करना सबसे कम जोखिम वाला विकल्प है। यदि कोई मरीज शराब पीता है, तो उसे अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिमों और दवाओं के संभावित प्रभावों पर चर्चा करनी चाहिए।

डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से ब्लड शुगर की निगरानी करनी चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं निर्धारित तरीके से लेनी चाहिए। शराब के कारण शुगर कम होने की आशंका हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। अत्यधिक प्यास, भ्रम, बेहोशी या गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच लिवर तथा डायबिटीज के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं।
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