AAP Boycott JPC : संविधान संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष का गुस्सा तेज होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बाद अब आम आदमी पार्टी (आप) ने भी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से अपना नाम वापस ले लिया है। रविवार को आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने एक वीडियो संदेश जारी कर यह घोषणा की कि वे इस विवादित विधेयक पर गठित संसदीय समिति में भाग नहीं लेंगे।

संजय सिंह ने इस विधेयक की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मोदी सरकार एक असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक विधेयक लेकर आई है, जिसका उद्देश्य विपक्षी नेताओं को दबाना और देश के लोकतंत्र को कमजोर करना है। उन्होंने कहा, “यह विधेयक भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र के खिलाफ है। भाजपा भ्रष्टाचार में लिप्त है और यह विधेयक देश के लोकतंत्र को नष्ट करने का एक प्रयास है।”

विपक्षी दलों का संयुक्त विरोध, तृणमूल और सपा ने भी किया था बहिष्कार
आप के फैसले से पहले तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी इस समिति से अपना प्रतिनिधि वापस ले लिया था। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने इसे ‘तमाशा’ बताया और कहा कि भाजपा द्वारा गठित समिति में विपक्ष के मतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उनका कहना था कि भाजपा सांसदों की संख्या अधिक होने के कारण समिति की रिपोर्ट विपक्ष की असहमति को दरकिनार कर पेश की जाती है।
सपा और तृणमूल दोनों ने इस विधेयक को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है और कहा है कि यह विपक्ष को निशाना बनाने का एक प्रयास है।
संविधान संशोधन विधेयक का विरोध और विधेयकों का विवाद
केंद्र सरकार ने हाल ही में तीन विधेयक संसद में पेश किए हैं — 130वां संविधान संशोधन विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनिक संशोधन विधेयक और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2025। इनमें से 130वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत, यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में 30 दिनों से अधिक रहता है और उस पर पाँच साल की सजा का आरोप है, तो उसे पद से हटा दिया जाएगा।
कांग्रेस, राजद और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि यह विधेयक ‘दोष सिद्ध होने तक निर्दोषता का सिद्धांत’ तोड़ता है और राजनीतिक शिकार की नीति को बढ़ावा देता है। इसके विरोध में संसद में विधेयक की प्रतियां फाड़ने जैसी कार्रवाई भी हुई।
विपक्षी दबाव में कांग्रेस का संघर्ष
विपक्षी दलों के इस बहिष्कार के बीच कांग्रेस अभी भी इस संसदीय समिति का हिस्सा बनी हुई है। लेकिन विपक्षी दलों के एक के बाद एक बहिष्कार से कांग्रेस पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वह भी समिति से अपना प्रतिनिधि वापस ले। विपक्ष के अंदर इस विधेयक को लेकर असंतोष गहरा गया है, जो केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।
संविधान संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष का एकजुट और तीव्र विरोध सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अब आम आदमी पार्टी ने संसदीय समिति से अपना नाम वापस लेकर यह संदेश दिया है कि वे इस विधेयक के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। केंद्र सरकार के लिए यह स्थिति राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है, जबकि संसद में विधेयक की प्रक्रिया और विपक्षी प्रतिक्रिया देश की राजनीतिक हवा को और गरमाएगी।
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