Ambikapur Fire News : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में स्थित मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा होलसेल एजेंसी में लगी भीषण आग पर आखिरकार 19-20 घंटे की कड़ी जद्दोजहद के बाद काबू पा लिया गया है। गुरुवार दोपहर से शुरू हुआ यह तांडव शुक्रवार तड़के तक जारी रहा। हालांकि, आग पर नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन तीन मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिल से अब भी धुआं उठ रहा है। एहतियात के तौर पर फायर ब्रिगेड की टीमें अब भी मौके पर मुस्तैद हैं। आग की तपिश और पानी की भारी बौछार के कारण इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया है, जिससे स्थिति और भी भयावह नजर आ रही है।
यह दर्दनाक हादसा गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे राम मंदिर के सामने वाली गली में हुआ। चश्मदीदों के मुताबिक, शुरुआत में आग का पता नहीं चला, लेकिन आधे घंटे बाद जब खिड़कियों से काला धुआं निकलने लगा, तब इलाके में हड़कंप मच गया। जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचतीं, आग पहली मंजिल को पूरी तरह अपनी चपेट में ले चुकी थी। प्रारंभिक जांच में आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। शहर के रिहायशी क्षेत्र के इस संकरे इलाके में आग ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे राहत कार्य में भी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
इस अग्निकांड ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी को भी उजागर कर दिया है। संचालक मुकेश अग्रवाल ने दावा किया था कि पटाखों का कारोबार दरिमा रोड पर शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन आग लगने के बाद गोदाम के भीतर घंटों तक पटाखों के जोरदार धमाके होते रहे। इससे यह स्पष्ट हो गया कि रिहायशी इलाके के इस गोदाम में भारी मात्रा में पटाखों का स्टॉक छिपाकर रखा गया था। प्लास्टिक के सामान और पटाखों के इस घातक मिश्रण ने आग में घी का काम किया। स्थिति को संभालने के लिए दरिमा एयरपोर्ट, अडानी माइंस और एसईसीएल विश्रामपुर से भी दमकल की विशेष टीमें बुलानी पड़ीं।
आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि उसने पड़ोस के घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आस-पास के छह परिवारों को उनके घरों से बाहर निकाला। पीछे रहने वाले परिवार और अन्य पड़ोसियों के घरों की दीवारों तक आग पहुंच गई थी। इन परिवारों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, जिसके बाद उन्होंने राम मंदिर आश्रम में शरण ली। इलाके की बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण लोगों को पूरी रात अंधेरे और उमस में गुजारनी पड़ी। मौके पर 100 से अधिक पानी के टैंकरों के इस्तेमाल के बाद ही आग की तीव्रता कम की जा सकी।
इस अग्निकांड में संचालक को करोड़ों रुपए के वित्तीय नुकसान का अनुमान है। तीन मंजिला इमारत में रखा लाखों का प्लास्टिक सामान और अवैध पटाखा स्टॉक पूरी तरह खाक हो गया है। प्रशासन अब नुकसान का सटीक आकलन करने में जुटा है। साथ ही, घनी आबादी वाले क्षेत्र में पटाखों का भंडारण करने के मामले में संचालक पर कानूनी शिकंजा भी कस सकता है। फिलहाल दमकल कर्मी ‘कूलिंग’ प्रक्रिया में जुटे हैं ताकि मलबे के नीचे दबी किसी भी चिंगारी से दोबारा आग न भड़क जाए। अंबिकापुर के इतिहास में यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी आगजनी की घटनाओं में से एक है।
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