Bangladesh violence
Bangladesh violence: बांग्लादेश में एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा की आग भड़क उठी है। राजधानी ढाका से लेकर औद्योगिक केंद्र खुलना तक, देश के कई हिस्सों में अराजकता का माहौल है। इस हिंसा के बीच अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की दर्दनाक खबरें सामने आ रही हैं। मैमनसिंह में एक हिंदू युवक की नृशंस हत्या ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है।
बांग्लादेश के मैमनसिंह शहर से इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां कट्टरपंथियों की उग्र भीड़ ने दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक को उसके घर से जबरन बाहर निकाला। पहले उसकी बेरहमी से पिटाई की गई और फिर उसे एक सार्वजनिक चौराहे पर ले जाकर जिंदा जला दिया गया। इस दौरान सैकड़ों लोग मूकदर्शक बनकर वीडियो बनाते रहे। हैरत की बात यह है कि इस जघन्य अपराध के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस ने अब तक हत्यारों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की है।
जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने दीपू चंद्र दास पर इस्लाम के अपमान का मनगढ़ंत आरोप लगाया था। इसी आरोप की आड़ में इस नृशंस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। ढाका से लगभग 125 किलोमीटर दूर हुई इस घटना ने वहां रह रहे अल्पसंख्यकों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। पुलिस की निष्क्रियता और सबूतों के बावजूद कार्रवाई न होना बांग्लादेश की वर्तमान कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस की दिग्गज नेता और सांसद प्रियंका गांधी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई हत्या किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि धर्म या पहचान के आधार पर हिंसा मानवता के खिलाफ अपराध है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि वह बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदायों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों का संज्ञान ले और वहां की सरकार के साथ सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा संवाद करे।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, वह अत्यंत निंदनीय है। गहलोत ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह अविलंब कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करे ताकि पड़ोसी देश में रहने वाले हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बांग्लादेश में ताजा हिंसा की शुरुआत शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन के चर्चित चेहरे शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुई। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस द्वारा हादी के निधन की पुष्टि किए जाने के बाद ‘इंकलाब मंच’ के समर्थक और कट्टरपंथी सड़कों पर उतर आए। अज्ञात हमलावरों द्वारा हादी को गोली मारे जाने के बाद सिंगापुर में उनका इलाज चल रहा था। उनकी मौत की खबर मिलते ही चटगांव, ढाका और खुलना जैसे शहरों में रात भर आगजनी और तोड़फोड़ का तांडव जारी रहा, जिसकी चपेट में निर्दोष अल्पसंख्यक आ रहे हैं।
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