Teacher Salary Cut : छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को सुदृढ़ करने और शिक्षकों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, जिले के स्कूलों में तैनात बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में भारी लापरवाही बरती जा रही है। विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट में यह सामने आया है कि जिले के कुल स्टाफ में से 42 प्रतिशत शिक्षक और कर्मचारियों ने अभी तक निर्धारित ऐप पर अपना पंजीयन ही नहीं कराया है। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अब इन सभी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है और वेतन कटौती की स्पष्ट चेतावनी दी है।

मात्र 58% शिक्षकों ने दर्ज की उपस्थिति, बाकी गायब
शिक्षा विभाग द्वारा जुटाए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बेमेतरा जिले में स्थिति काफी चिंताजनक है। केवल 58 प्रतिशत शिक्षकों ने ही ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। शेष 42 प्रतिशत शिक्षक और कर्मचारी या तो अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहे हैं या फिर उन्होंने तकनीकी या अन्य कारणों का हवाला देते हुए अब तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। यह लापरवाही न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता लाना है, जिसे नजरअंदाज करना अब शिक्षकों को महंगा पड़ेगा।

935 स्कूलों में 1.43 लाख छात्रों का भविष्य है दांव पर
बेमेतरा जिले के शैक्षणिक ढांचे की बात करें तो यहां कुल 935 सरकारी स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 1.43 लाख से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन छात्रों को सही दिशा और मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी 659 उन शिक्षकों और कर्मचारियों पर है, जिन्होंने अभी तक ऐप पर पंजीकरण नहीं किया है। बड़ी संख्या में छात्रों का भविष्य इन शिक्षकों की कार्यशैली पर निर्भर करता है, लेकिन रजिस्ट्रेशन न कराना सीधे तौर पर छात्रों के प्रति इनकी उदासीनता को दर्शाता है। इतने बड़े स्तर पर अनुपस्थिति या रजिस्ट्रेशन की कमी से प्रशासनिक व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है।
तकनीकी समस्याओं और सर्वर डाउन के दावों की पड़ताल
विभाग को शिक्षकों की ओर से लगातार तकनीकी खामियों, ऐप में एरर और सर्वर डाउन होने जैसी शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। हालांकि, इन शिकायतों के बाद भी विभाग ने अपनी सख्ती कम नहीं की है। प्रशासन का तर्क है कि सर्वर या तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर लंबे समय तक उपस्थिति से बचा नहीं जा सकता। इसी कड़ी में, अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों और कर्मचारियों को विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों के जरिए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्यों न उनकी इस लापरवाही के लिए उन पर सख्त कार्रवाई करते हुए वेतन में कटौती की जाए।
भविष्य के लिए प्रशासन का कड़ा संदेश
इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में अनुशासन बहाल करना है। बेमेतरा जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी सूरत में शैक्षणिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी शिक्षक ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में आनाकानी करेंगे, उनके खिलाफ विभागीय नियम पुस्तिका के तहत कठोर निर्णय लिए जाएंगे। यह कार्रवाई न केवल बेमेतरा के लिए, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के लिए एक संदेश है कि डिजिटल इंडिया के दौर में शिक्षकों को तकनीक के साथ तालमेल बैठाना ही होगा, अन्यथा उन्हें परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।

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