Heart Healt : जब दिल की सेहत को बेहतर रखने की बात आती है, तो सबसे पहले खानपान पर ध्यान जाता है। भोजन में इस्तेमाल होने वाला तेल भी इसी का अहम हिस्सा है। बाजार में सरसों का तेल, राइस ब्रान ऑयल, तिल का तेल, नारियल तेल और घी जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में यह कहना आसान नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए सिर्फ एक ही तेल सबसे अच्छा है। तेल चुनते समय उसकी मात्रा, इस्तेमाल का तरीका और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
Food Pharmer ने वीडियो में समझाया तेल का सही इस्तेमाल
सोशल मीडिया पर Food Pharmer के नाम से लोकप्रिय रेवंत हिमतसिंगका ने एक वीडियो में खाने के तेल से जुड़े इसी सवाल को आसान अंदाज में समझाने की कोशिश की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब तक तेल इंजन में इस्तेमाल होने वाला मोबिल ऑयल नहीं है, तब तक हर कुकिंग ऑयल के कुछ फायदे और नुकसान हो सकते हैं। उनके मुताबिक, सिर्फ तेल का ब्रांड या प्रकार महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भी मायने रखता है कि उसे कितनी मात्रा में और किस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
बहुत ज्यादा तेल गर्म करने से बचने की सलाह
Food Pharmer ने खाना पकाते समय तेल को जरूरत से ज्यादा गर्म करने और बार-बार डीप फ्राई करने से बचने पर जोर दिया। भारतीय खानपान में पकौड़े, पूड़ी, समोसे और कई अन्य खाद्य पदार्थों को ज्यादा तेल में तलकर खाने का चलन है। बार-बार तेल को बहुत ज्यादा तापमान पर गर्म करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए खाना बनाते समय तापमान और तेल की मात्रा दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
सरसों का तेल हो सकता है अच्छा विकल्प
रेवंत हिमतसिंगका के अनुसार भारतीय रसोई में सरसों का तेल एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, उन्होंने इसे एकमात्र विकल्प नहीं बताया। राइस ब्रान ऑयल, तिल का तेल, नारियल तेल और घी को भी भोजन में शामिल किया जा सकता है। अलग-अलग तेलों की अपनी विशेषताएं होती हैं, इसलिए व्यक्ति अपनी जरूरत और खानपान के अनुसार उनका इस्तेमाल कर सकता है।
घी खाते समय मात्रा का रखें ध्यान
घी भारतीय खानपान का पारंपरिक हिस्सा है और कई घरों में इसका नियमित इस्तेमाल होता है। Food Pharmer ने घी के मामले में घर पर तैयार शुद्ध घी को प्राथमिकता देने की बात कही। हालांकि, घी भी वसा का स्रोत है, इसलिए इसे जरूरत से ज्यादा खाना उचित नहीं माना जाता। सिर्फ अच्छा तेल या घी चुनना पर्याप्त नहीं है। पूरे दिन में कुल कितनी मात्रा में तेल और घी लिया जा रहा है, इस पर भी नजर रखना जरूरी है।
क्या रोज एक ही तेल इस्तेमाल करना जरूरी है
Food Pharmer के मुताबिक, अलग-अलग तेलों को बदल-बदलकर इस्तेमाल करना एक विकल्प हो सकता है। इससे रसोई में एक ही तरह के तेल पर निर्भरता कम की जा सकती है। हालांकि, तेल बदलने का मतलब यह नहीं है कि किसी भी तेल का अधिक मात्रा में सेवन किया जाए। संतुलित मात्रा और खाना पकाने का सही तरीका हमेशा महत्वपूर्ण रहता है।
स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार लें फैसला
हर व्यक्ति की उम्र, खानपान, वजन और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। जिन लोगों को हृदय संबंधी बीमारी है या डॉक्टर ने तेल और वसा के सेवन को लेकर विशेष सलाह दी है, उन्हें चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए। किसी सोशल मीडिया वीडियो की जानकारी को व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
हार्ट हेल्थ सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं
दिल की सेहत केवल इस बात से तय नहीं होती कि खाना किस तेल में पकाया जा रहा है। पूरी डाइट, तली हुई चीजों का सेवन, नमक और चीनी की मात्रा, शारीरिक गतिविधि, वजन, नींद और अन्य जीवनशैली संबंधी आदतें भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए हार्ट हेल्थ के लिए किसी एक तेल को जादुई समाधान मानने के बजाय संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
सही तेल के साथ सही मात्रा भी जरूरी
कुल मिलाकर, Food Pharmer की बातों से यह समझा जा सकता है कि कुकिंग ऑयल चुनते समय केवल उसके नाम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। तेल की मात्रा, खाना पकाने का तरीका और उसे दोबारा इस्तेमाल करने जैसी आदतों पर भी ध्यान देना चाहिए। संतुलित डाइट और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ सही तरीके से तेल का इस्तेमाल दिल की सेहत के लिए बेहतर खानपान का हिस्सा बन सकता है।
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