Bhilai Accident : छत्तीसगढ़ के औद्योगिक गढ़ भिलाई में सोमवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने औद्योगिक सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। भिलाई के औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक फैक्ट्री में काम के दौरान 30 से 35 फीट की ऊंचाई से गिरने से एक वेल्डर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस दुर्घटना ने कार्यस्थल पर मौजूद सुरक्षा मानकों और कामगारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

असंतुलन बिगड़ने से कंक्रीट के फर्श पर गिरा मजदूर
दुर्ग सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि मृतक की पहचान घासीदास नगर, भिलाई निवासी 40 वर्षीय शिवकुमार सोनी के रूप में हुई है। शिवकुमार पेशे से एक वेल्डर थे और उन्होंने महज एक सप्ताह पहले ही इस फैक्ट्री में अपना कार्यभार संभाला था। सोमवार की शाम, जब वे लगभग 35 फीट की ऊंचाई पर चढ़कर वेल्डिंग का कार्य कर रहे थे, तभी अचानक वह शीट टूट गई जिस पर वे खड़े थे। शीट के टूटते ही शिवकुमार का संतुलन बिगड़ा और वे सीधे नीचे कंक्रीट के फर्श पर आ गिरे। सिर और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों में गंभीर चोट लगने के कारण उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

पुलिस जांच में सुरक्षा मानकों की होगी बारीकी से पड़ताल
हादसे की सूचना मिलते ही जामुल थाना पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई पूर्ण की और मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने कहा कि पुलिस इस पूरे मामले की अत्यंत गंभीरता से जांच कर रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या कंपनी प्रबंधन द्वारा कार्यस्थल पर सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया जा रहा था? साथ ही, पुलिस यह भी पता लगा रही है कि ऊंचाई पर काम करने के लिए अनिवार्य ‘सेफ्टी बेल्ट’ और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण मृतक वेल्डर को मुहैया कराए गए थे या नहीं। यदि प्रबंधन की ओर से कोई लापरवाही सामने आती है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

परिवार में मातम और मुआवजे की उठी मांग
एक सप्ताह पूर्व ही नई नौकरी शुरू करने वाले शिवकुमार की इस आकस्मिक मृत्यु से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। मृतक के आश्रितों का रो-रोकर बुरा हाल है। औद्योगिक क्षेत्र में लगातार हो रही इस तरह की घटनाएं कामगारों के लिए खतरे की घंटी हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि अधिकांश फैक्ट्रियों में जल्दबाजी और लागत बचाने के चक्कर में मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ किया जाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रबंधन पर क्या दबाव बनता है।
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