CG Snake Bite : सरगुजा संभाग में करैत सांप का कहर, तीन सगे भाई-बहनों समेत चार की मौत

CG Snake Bite : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में मानसून की पहली बारिश के साथ ही जहरीले सांपों का आतंक तेजी से फैल गया है। पिछले तीन दिनों में बलरामपुर और जशपुर जिले से सामने आई हृदयविदारक घटनाओं ने पूरे अंचल को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं में एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों समेत कुल चार लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। करैत सांप के लगातार हमलों ने ग्रामीण इलाकों में दहशत फैला दी है। लोग अब रात में जमीन पर सोने से कतरा रहे हैं और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं। प्रशासन ने आमजन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं, लेकिन लगातार हो रही इन मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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बलरामपुर में तीन सगे भाई-बहनों की मौत से पसरा मातम

सबसे भीषण त्रासदी बलरामपुर जिले में हुई, जहां एक ही परिवार के तीन मासूम भाई-बहन रात में सोते समय करैत का शिकार बन गए। विशेषज्ञ बताते हैं कि करैत सांप के काटने पर दर्द न के बराबर होता है, जिसके चलते बच्चों को सांप के काटने का अहसास तक नहीं हुआ। सुबह जब बच्चों की स्थिति नाजुक हुई, तो परिजन उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर दौड़े, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; रास्ते में ही तीनों ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा है। शोकाकुल ग्रामीणों ने सरकार से ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की पुरजोर मांग की है।

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जशपुर में भी एक ग्रामीण की जान, प्राथमिक उपचार बना चुनौती

बलरामपुर की दुखद घटना के कुछ ही घंटों बाद, जशपुर जिले में भी एक ग्रामीण की करैत के डसने से मौत हो गई। वह भी सोते समय सांप का शिकार बना। समय पर अस्पताल न पहुंच पाने और प्राथमिक उपचार के अभाव में उसने भी दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि दूरदराज के इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काफी दूर स्थित हैं, जिससे सांप के डसने जैसे आपातकालीन मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर इलाज नहीं मिल पाता। अब ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल चिकित्सा सुविधा, एंटी-वेनम की उपलब्धता और एंबुलेंस सेवाओं को मजबूत करने की मांग जोर पकड़ रही है।

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‘साइलेंट किलर’ से निपटने के लिए सावधानी और जागरूकता ही बचाव

करैत सांप को चिकित्सा जगत में ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि इसके जहर का प्रभाव चुपचाप और दर्द रहित तरीके से फैलता है। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि यदि पीड़ित को समय रहते एंटी-वेनम का इंजेक्शन और सही मेडिकल उपचार मिल जाए, तो जान बचाई जा सकती है। मानसून में जब सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, तो वे रिहायशी इलाकों की तरफ रुख करते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग जमीन पर सोने के बजाय खाट का प्रयोग करें, रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें, घर के आसपास झाड़ियों की सफाई रखें और किसी भी स्थिति में सांप को पकड़ने या उसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश न करें।

झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, तुरंत अस्पताल पहुंचें

प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के फेर में अपना कीमती समय बर्बाद न करें। ऐसी अंधविश्वास भरी परंपराएं अक्सर जानलेवा साबित होती हैं। सांप के डसने पर बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता है। प्रशासन ने आपातकालीन स्थितियों के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा है। मानसून का यह दौर सावधानी बरतने का है, क्योंकि सतर्कता ही इन अनमोल जिंदगियों को बचाने का सबसे प्रभावी कवच है।

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Chandan Das

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