FIFA World Cup : फुटबॉल जगत में शनिवार का दिन एक ऐसे देश के लिए यादगार बन गया, जिसने पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया था। महज 5 लाख की आबादी वाले छोटे से द्वीप राष्ट्र ‘केप वेर्दे’ ने नॉकआउट राउंड में जगह बनाकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। शनिवार को स्पेन द्वारा उरुग्वे को 1-0 से हराने के बाद केप वेर्दे का ‘राउंड ऑफ 32’ का सफर आधिकारिक रूप से सुनिश्चित हो गया। अब इस ऐतिहासिक मुकाबले में उनका सामना मौजूदा विश्व विजेता अर्जेंटीना से होगा। अपनी पहली ही वर्ल्ड कप उपस्थिति में ऐसा करिश्मा कर दिखाना फुटबॉल प्रेमियों के लिए किसी अचंभे से कम नहीं है।
अजेय रहकर ग्रुप स्टेज से नॉकआउट तक का शानदार सफर
केप वेर्दे का ग्रुप स्टेज में प्रदर्शन अनुकरणीय रहा। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत स्पेन जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेलकर की, जिससे उनके मजबूत डिफेंस का पता चला। इसके बाद उरुग्वे के खिलाफ 2-2 का रोमांचक ड्रॉ और अंत में सऊदी अरब के साथ 0-0 का मुकाबला खेलकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे किसी भी बड़ी टीम को कड़ी चुनौती दे सकते हैं। बिना कोई मैच हारे, तीन अंकों के साथ ग्रुप H में दूसरे स्थान पर रहकर उन्होंने अगले दौर में प्रवेश किया। वे 2010 की विजेता स्पेन के पीछे रहे, लेकिन दो बार की चैंपियन उरुग्वे को पीछे छोड़ने में सफल रहे।
आबादी में दिल्ली के चांदनी चौक से छोटा, हौसलों में विशाल
केप वेर्दे की कुल आबादी लगभग 5.25 लाख है, जो दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र से भी कम है। आबादी के लिहाज से यह वर्ल्ड कप इतिहास में नॉकआउट तक पहुंचने वाला सबसे छोटा देश बन गया है। इससे पहले आइसलैंड और कुराकाओ जैसे छोटे देश वर्ल्ड कप में आए थे, लेकिन वे ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सके। केप वेर्दे 2002 में सेनेगल के बाद एकमात्र ऐसा देश है, जो अपने पदार्पण वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज के बाद बिना कोई मैच हारे नॉकआउट चरण में पहुंचा है। 56 वर्षीय कोच बुबिस्टा की रणनीति और खिलाड़ियों का अनुशासन इस सफलता का मुख्य आधार बना है।
गोलकीपर वोज़िन्हा बने जीत के महानायक
केप वेर्दे की इस सफलता में उनके 40 वर्षीय गोलकीपर वोज़िन्हा का योगदान अविस्मरणीय है। सऊदी अरब के खिलाफ मैच के दौरान वे गोलपोस्ट के आगे एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े रहे। उन्होंने पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में मोहम्मद कानो के खतरनाक हेडर को रोककर टीम को पिछड़ने से बचाया। इसके बाद 66वें और 92वें मिनट में उन्होंने शानदार छलांग लगाते हुए विपक्षी खिलाड़ियों के सटीक शॉट्स को विफल कर दिया। वोज़िन्हा का यह प्रदर्शन न केवल उनकी फिटनेस बल्कि उनकी एकाग्रता को भी दर्शाता है, जिसने टीम को टूर्नामेंट में बनाए रखा।
अर्जेंटीना के खिलाफ 3 जुलाई को होगा महामुकाबला
अब पूरी दुनिया की निगाहें 3 जुलाई को मियामी गार्डन्स में होने वाले मुकाबले पर टिकी हैं। केप वेर्दे का सामना मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना से होगा। यह मुकाबला छोटे से देश की ‘डेविड बनाम गोलियत’ जैसी लड़ाई की तरह है। केप वेर्दे के खिलाड़ी अब विश्व के सबसे बड़े सितारों के खिलाफ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। चाहे नतीजा जो भी हो, केप वेर्दे ने अपनी पहली ही कोशिश में जो छाप छोड़ी है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। फुटबॉल की यह छोटी सी टीम अब वैश्विक पटल पर एक नई ताकत के रूप में उभरी है।
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