CBI Raid on Anil Ambani: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस एडीए समूह की कंपनियों के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए आज मुंबई और दिल्ली में कुल 15 प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुख्य रूप से रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में की गई है। सीबीआई की जांच में रिलायंस समूह से जुड़ी 23 परस्पर संबद्ध संस्थाएं संदेह के घेरे में आई हैं। इन पर आरोप है कि आरसीएफएल और आरएचएफएल ने बैंकों से जो ऋण लिया था, उसे नियमों के विरुद्ध समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट कर दिया। इस कथित वित्तीय हेराफेरी के कारण ऋण देने वाले बैंकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

पूर्व अधिकारियों के परिसरों पर भी तलाशी
इस छापेमारी अभियान के दौरान जांच एजेंसी ने न केवल कॉर्पोरेट दफ्तरों को निशाना बनाया, बल्कि समूह के कई पूर्व उच्च अधिकारियों के निजी परिसरों की भी सघन तलाशी ली। इनमें रिलायंस होम फाइनेंस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO), समूह के पूर्व सचिवीय प्रमुख (Secretarial Head) और आरएचएफएल के पूर्व मुख्य ट्रेजरी सलाहकार शामिल हैं। सीबीआई को यह सर्च वारंट मुंबई स्थित सीबीआई मामलों की विशेष अदालत से प्राप्त हुआ था। एजेंसी का दावा है कि छापेमारी के दौरान उन्हें कई बेहद महत्वपूर्ण और आपत्तिजनक दस्तावेज हाथ लगे हैं, जो कथित घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में सहायक साबित होंगे। इन दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।

27,337 करोड़ रुपए का है कथित महाघोटाला
यह पूरा मामला बैंकों और वित्तीय संस्थानों को हुए बड़े पैमाने पर नुकसान से जुड़ा है। सीबीआई ने इससे पहले रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस टेलीकॉम के खिलाफ सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। ये मामले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से प्राप्त औपचारिक शिकायतों के आधार पर दर्ज हुए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन वित्तीय धांधलियों के चलते सरकारी बैंकों और एलआईसी को कुल मिलाकर करीब 27,337 करोड़ रुपए का चूना लगा है। गौरतलब है कि सीबीआई इससे पहले भी रिलायंस एडीए समूह के विभिन्न मामलों में 38 अलग-अलग स्थानों पर छापे मार चुकी है।
कानून की गिरफ्त में आरोपी और भविष्य की राह
सीबीआई अब तक इस बड़े मामले में चार आरोपपत्र (Chargesheet) दाखिल कर चुकी है। जांच एजेंसी द्वारा की गई पिछली कार्यवाहियों में सात मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि इन सभी मामलों की जांच देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) की निगरानी में संचालित की जा रही है, जो इस प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है। एजेंसी ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि वह इस मामले में निष्पक्ष, व्यापक और त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। जब्त किए गए दस्तावेजों की गहन जांच के बाद जल्द ही और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
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