Sukma Maoist Surrender: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियान को एक के बाद एक बड़ी सफलताएं मिल रही हैं। सुकमा में 50 लाख रुपये के सामूहिक इनामी सहित 27 सक्रिय माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद, अब उत्तर बस्तर के टॉप नक्सल लीडर राजू सलाम के भी बड़े समूह के साथ आत्मसमर्पण करने की खबर सामने आ रही है। महाराष्ट्र से लेकर छत्तीसगढ़ तक, पिछले 24 घंटों के भीतर लगभग 90 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है, जिसे ‘लाल आतंक’ के खिलाफ सुरक्षा बलों की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। सुकमा में सामूहिक आत्मसमर्पण बुधवार को सुकमा जिले में 27 माओवादियों ने पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण की अगुवाई में आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में पीएलजीए बटालियन नंबर 01 के दो कुख्यात हार्डकोर माओवादी शामिल हैं, जिनमें 10 महिलाएं और 17 पुरुष शामिल हैं। सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी, गांवों तक पहुंचते पुलिस कैम्प, और शासन की नई पुनर्वास नीति से प्रभावित थे। उन्होंने खुलासा किया कि ऊपर बैठे बाहरी माओवादी नेताओं का भेदभाव और स्थानीय आदिवासियों पर हो रहा शोषण ही उनके लौटने का मुख्य कारण बना। गढ़चिरौली और कोंडागांव में भी बड़ी सफलता नक्सल विरोधी अभियान की सफलता केवल बस्तर तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में भी बुधवार को सबसे बड़ा आत्मसमर्पण हुआ, जहां टॉप नक्सल लीडर सोनू दादा उर्फ भूपति ने अपने 60 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। वहीं, छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में भी पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली। यहां पूर्वी बस्तर डिवीजन के अंतर्गत टेलर टीम कमांडर (ACM) के पद पर सक्रिय, 5 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली गीता उर्फ कमली सलाम ने आत्मसमर्पण किया। कांकेर से बड़ी खबर: राजू सलाम कर सकता है सरेंडर इन आत्मसमर्पणों के बीच सबसे बड़ी खबर कांकेर जिले से आ रही है, जहां कंपनी नंबर 5 का लीडर राजू सलाम, कमांडर प्रसाद, मीना समेत बड़ी संख्या में माओवादियों के सरेंडर करने की तैयारी है। राजू सलाम उत्तर बस्तर का एक प्रमुख नक्सल लीडर माना जाता है, और उसके आत्मसमर्पण से पूरे उत्तर बस्तर डिवीजन की नक्सली गतिविधियों को गहरा झटका लगेगा। छत्तीसगढ़ के बस्तर के अंदरूनी इलाकों में बढ़ते पुलिस कैम्प, राज्य की ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना और नई पुनर्वास नीति का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। एक साथ इतने बड़े पैमाने पर नक्सलियों का आत्मसमर्पण यह संकेत देता है कि माओवादी अपनी खोखली विचारधारा से निराश हो चुके हैं और अब मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जीना चाहते हैं। यह घटनाक्रम नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। Read More: Chaitanya Baghel news : पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य की न्यायिक रिमांड बढ़ी, दिवाली जेल में मनेगी














