CG Monsoon Session 2026 : छत्तीसगढ़ विधायी राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का आगामी मानसून सत्र 13 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है, जो 17 जुलाई तक निरंतर चलेगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय द्वारा आधिकारिक अधिसूचना और विस्तृत कार्यसूची जारी कर दी गई है। मात्र 5 दिनों की अवधि वाले इस बेहद संक्षिप्त सत्र में कुल 5 महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों के दौरान सदन में प्रश्नोत्तर काल, आवश्यक शासकीय कार्य और राज्य के विभिन्न वित्तीय मामलों पर गहन चर्चा की जाएगी, जिससे राज्य की विकास योजनाओं को गति मिल सके।

सत्र के अंतिम दिन शासकीय कार्यों के साथ गैर-शासकीय कार्य भी होंगे
सचिवालय द्वारा निर्धारित की गई कार्यसूची के अनुसार, मानसून सत्र के शुरुआती चार दिनों तक नियमित रूप से प्रश्नोत्तर काल और महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों का निष्पादन किया जाएगा। वहीं, सत्र के अंतिम दिन यानी 17 जुलाई को प्रश्नोत्तर काल और शासकीय दायित्वों को पूरा करने के साथ-साथ विशेष रूप से गैर-शासकीय कार्य भी पटल पर लिए जाएंगे। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि इस बार सदन में सरकारी स्कूलों में मंत्र-पाठ को अनिवार्य किए जाने के फैसले और राज्य की वर्तमान कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष सरकार को पूरी तरह से घेरने की रणनीति बना रहा है।

योजनाओं का ब्यौरा देगी साय सरकार, विपक्ष ने कसी अपनी कमर
इस आगामी मानसून सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था, किसानों की बदहाली, बिजली-पानी की किल्लत, बदहाल शिक्षा, चरमराती स्वास्थ्य सेवाएं और विभिन्न विभागों द्वारा हाल ही में लिए गए कुछ विवादित फैसलों के मुद्दों पर साय सरकार को चौतरफा घेरने की पुख्ता तैयारी कर ली है। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भी विपक्ष के हर वार का जवाब देने और अपनी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं व उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा सदन के सामने मजबूती से रखने की तैयारी में जुटा है। चूंकि सत्र की अवधि केवल 5 दिनों की है, इसलिए पहले ही दिन विपक्ष की ओर से सत्र की समय-सीमा को बढ़ाने की जोरदार मांग उठाई जा सकती है।
स्कूलों में मंत्र-पाठ और हसदेव जंगल कटाई पर तीखी बहस के आसार
इस छोटे से सत्र के बेहद हंगामेदार रहने की पूरी संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से स्कूलों में सुबह के वक्त मंत्र-पाठ लागू करने के हालिया सरकारी आदेश, राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, हसदेव अरण्य क्षेत्र में हो रही जंगलों की अंधाधुंध कटाई, सरकारी शराब दुकानों में तय कीमत से अधिक यानी ओवररेटिंग पर शराब बेचे जाने के मामले, किसानों को आ रही व्यावहारिक समस्याएं, नगरीय निकायों के लंबित मुद्दे और कई विभागों में पनपे हालिया विवादों को लेकर सदन के भीतर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त आमने-सामने की स्थिति बन सकती है और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।


पिछले बजट सत्र में पास हुआ था ऐतिहासिक धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026
यदि हम पूर्व में हुए विधायी कार्यों पर नजर डालें, तो छत्तीसगढ़ विधानसभा के पिछले बजट सत्र में राज्य सरकार ने बेहद कड़ा कदम उठाते हुए ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ को सदन से सर्वसम्मति से पारित कराया था। इस नए और ऐतिहासिक कानून के प्रावधानों के तहत राज्य में किसी भी तरह से अवैध या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण के मामलों में यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसे 7 से लेकर 10 साल तक की कठोर जेल की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही दोषी व्यक्ति पर कम से कम 5 लाख रुपये का भारी आर्थिक जुर्माना लगाने का भी सख्त प्रावधान सुनिश्चित किया गया है।
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए भी बने सख्त कानून
बजट सत्र के दौरान केवल धर्मांतरण विरोधी कानून ही नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए थे। सत्र के अंतिम दिन राज्य सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को सख्ती से रोकने से जुड़ा एक बेहद कड़ा विधेयक पास किया था। इसके साथ ही ‘स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड बिल 2026’ को भी सदन की मंजूरी मिल गई थी। परीक्षा गड़बड़ी रोकथाम कानून के अंतर्गत अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले अभ्यर्थियों, सॉल्वर गैंग और नकल माफियाओं के खिलाफ बेहद सख्त नियम तय किए गए हैं, ताकि भविष्य में होने वाली सभी परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सकें।
West Bengal Politics : जमीन घोटाला मामले में घिरे सुमित राय, मेदिनीपुर अदालत ने जारी किया बड़ा आदेश












